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Tuesday, 10 May 2022
वट सावित्री व्रत 2022 तिथि मुहूर्त एवम् पूजन विधि
Astha Jyotish👉वट सावित्री व्रत कब है? 2022 में
जानें डेट, शुभ मुहूर्त, महत्व व पूजन
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👉ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले व्रतों में वट अमावस्या को बेहद उत्तम व प्रभावी व्रतों में से एक माना गया है। इस व्रत को करके सौभाग्यवती महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष के पास जाकर विधिवत पूजा करती हैं। इसके साथ ही वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि के साथ लंबी आयु की प्राप्ति होती है।
👉वट सावित्री व्रत डेट 2022-
वट सावित्री व्रत 30 मई 2022, दिन सोमवार को रखा जाएगा। अमावस्या तिथि 29 मई को दोपहर 02 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगी, जो कि 30 मई को शाम 05 बजे तक रहेगी।
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वट सावित्री व्रत कथा 👉
शास्त्रों के अनुसार, वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। दूसरी कथा के अनुसार मार्कण्डेय ऋषि को भगवान शिव के वरदान से वट वृक्ष के पत्ते में पैर का अंगूठा चूसते हुए बाल मुकुंद के दर्शन हुए थे, तभी से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। वट वृक्ष की पूजा से घर में सुख-शांति, धनलक्ष्मी का भी वास होता है।
👉वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री-
वट सावित्री व्रत की पूजन सामग्री में सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां, धूप, दीप, घी, बांस का पंखा, लाल कलावा, सुहाग का समान, कच्चा सूत, चना (भिगोया हुआ), बरगद का फल, जल से भरा कलश आदि शामिल करना चाहिए।
👉वट सावित्री व्रत पूजा विधि-
-इस दिन प्रातःकाल घर की सफाई कर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें।
- इसके बाद पवित्र जल का पूरे घर में छिड़काव करें।
-बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना करें।
- ब्रह्मा के वाम पार्श्व में सावित्री की मूर्ति स्थापित करें।
- इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान तथा सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करें। इन टोकरियों को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर रखें।
- इसके बाद ब्रह्मा तथा सावित्री का पूजन करें।
- अब सावित्री और सत्यवान की पूजा करते हुए बड़ की जड़ में पानी दें।
-पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें।
-जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा करें।
-बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनें।
-भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर अपनी सास के पैर छूकर उनका आशीष प्राप्त करें।
-यदि सास वहां न हो तो बायना बनाकर उन तक पहुंचाएं।
-पूजा समाप्ति पर ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि वस्तुएं बांस के पात्र में रखकर दान करें।
-इस व्रत में सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण करना न भूलें। यह कथा पूजा करते समय दूसरों को भी सुनाएं।
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Sunday, 3 April 2022
नौ औषध नवदुर्गा को प्रिय क्यूं है
Astha Jyotish इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का
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मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।
इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।
शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है।
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१ प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़👉 नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकारकी समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।
पथया - जो हित करने वाली है।
कायस्थ - जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता - अमृत के समान
हेमवती - हिमालय पर होने वाली।
चेतकी -चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता)- शिवा यानी कल्याण करने वाली।
२ द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी👉 ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वालीऔर स्वर को मधुर करने वाली है।
इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी कीआराधना करना चाहिए।
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३ तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर👉 नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है।
यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।
४ चतुर्थ कुष्माण्डा यानि पेठा👉 नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं।
इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिकरूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ितव्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कुष्माण्डादेवी की आराधना करना चाहिए।
५ पंचम स्कंदमाता यानि अलसी👉 नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।
"अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।"
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।
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६ षष्ठम कात्यायनी यानि मोइया👉 नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है।
इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए।
७ सप्तम कालरात्रि यानि नागदौन👉 दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है।
यह नागदौन औषधि केरूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली एवं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना
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Tuesday, 29 March 2022
जन्म नक्षत्र से जानें कि सफलता के लिए किस क्षेत्र में बनाएं अपना करियर?
Astha Jyotish जन्म नक्षत्र से जानें कि सफलता के लिए किस क्षेत्र में बनाएं अपना करियर?
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आज हम आपको नक्षत्र की दुनिया से जुड़ी एक अन्य बात बताने जा रहे हैं जिसके अनुसार आप यह भी जान सकते हैं कि किस क्षेत्र में करियर बनाना आपके लिए फायदेमंद होगा।
27 नक्षत्र
हम 27 नक्षत्रों के विषय में जानते हैं। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इन 27 में से आपका जन्म किस नक्षत्र में हुआ है, इसके आधार पर अगर आप अपने करियर का निर्धारण करेंगे तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी।
अश्विनी नक्षत्र
सबसे पहले जानते हैं उन लोगों के बारे में जिनका जन्म अश्विनी नक्षत्र में हुआ है। अश्विनी नक्षत्र में जन्मे लोग अगर यातायात से जुड़ा कोई कार्य करेंगे तो उन्हें सफलता मिलेगी। इसके अलावा खेल, दवाइयां, कृषि, जिम, जौहरी व सुनार आदि से संबंधित क्षेत्र भी फायदा पहुंचाएंगे।
भरणी नक्षत्र
भरणी नक्षत्र में जन्मे जातकों को जन्म देने वाली दाई, गृह सेवक, शवगृह अधिकारी व दाह-संस्कार से संबंधित कार्य करने चाहिए। वे बच्चों का ध्यान रखने वाले या नर्सरी स्कूल के अध्यापक के तौर पर भी कार्य कर सकते हैं। तम्बाकू, कॉफी व चाय से जुड़े क्षेत्र भी लाभ पहुंचाएंगे।
कृत्तिका नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग ऐसे क्षेत्र में सफल हो सकते हैं, जो नुकीली चीज या तेज धार से जुड़े हों। आप चाकू व तलवार के निर्माण से जुड़ सकते हैं या फिर अच्छे लोहार या वकील भी साबित हो सकते हैं। अगर आप ऐसे किसी कार्य से जुड़ते हैं जिसके अनुसार नशे के आदी लोगों को सुधारा जाता है, तो अवश्य सफलता मिलेगी।
रोहिणी नक्षत्र
रोहिणी नक्षत्र से संबंधित लोग खान-पान के कार्य से जुड़ेंगे तो अवश्य सफलता मिलेगी। खाना बनाना हो या फिर बांटना- ये कार्य आपके लिए उत्तम हैं। इसके अलावा कला का क्षेत्र भी आपके लिए है। आप अच्छे कलाकार, गायक व संगीतकार भी हो सकते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे लोग रचनात्मक होते हैं।
मृगशिरा नक्षत्र
यात्रा से जुड़े कार्य में अगर आप संलग्न हैं तो आपको अवश्य ही सफलता मिलेगी। इसके अलावा शिक्षा, खगोलशास्त्र व पैसे का हिसाब-किताब रखना- ये सभी क्षेत्र भी आपको लाभ दिलवाएंगे। कपड़े के काम में लिप्त लोगों को भी लाभ मिलेगा।
आर्द्रा नक्षत्र
बिजली के उपकरण या बिजली से संबंधित कोई अन्य कार्य करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। कम्प्यूटर, तकनीक, गणित, वैज्ञानिक व गेमिंग आदि से संबंधित क्षेत्र आपके लिए हैं। इसके अलावा डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ का काम भी आपको सूट करेगा। अगर आप जासूस हैं या रहस्य सुलझाने जैसे कार्य कर रहे हैं, तो भी आपको सफलता मिलेगी।
पुनर्वसु नक्षत्र
काल्पनिक कहानियां लिखने या खरीदने-बेचने से संबंधित कोई कार्य करना- ये आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे। यात्रा और रखरखाव से संबंधित कार्य भी आप कर सकते हैं। अगर आप होटल मैनेजमेंट में कार्यरत हैं या फिर दीक्षा देने का काम करते हैं तो आपको फायदा मिलेगा। इतिहासकार या भेड़-बकरियों को पालने वाले लोग भी सफलता प्राप्त करेंगे।
पुष्य नक्षत्र
दूध से संबंधित व्यापार करने वाले लोग सफलता प्राप्त करेंगे। कैटरिंग करने वाले और होटल चलाने वाले लोग भी अच्छे व्यवसाय में हैं। नेता, शासक, धार्मिक कार्य करने वाले लोग, शिक्षक और अध्यापक आदि लोग लाभ प्राप्त करते हैं।
आश्लेषा नक्षत्र
पेट्रोलियम, सिगरेट, कानूनी व दवाइयों से संबंधित इंडस्ट्री से जुड़े लोग अवश्य लाभ प्राप्त करेंगे। इस नक्षत्र में जन्मे लोग तांत्रिक, सांप का जहर, बिल्ली पालने वाले, सीक्रेट सर्विस करने वाले व मनोवैज्ञानिक होते हैं। ये पोंगे पंडित और आत्माओं को बुलाने वाले भी होते हैं।
माघ नक्षत्र
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग शाही तो नहीं होते लेकिन उनका शाही घरानों से सीधा संपर्क रहता है। वे उनके मैनेजर भी हो सकते हैं और महत्वपूर्ण कर्मचारी भी। इसके अलावा सरकार के अधीन बड़े पदों में काम करने वाले, बड़े वकील, जज, नेता, वक्ता, ज्योतिष व पुरातत्व वैज्ञानिक भी इसी नक्षत्र में जन्म लेने वाले होते हैं।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र
इस नक्षत्र में जन्मे लोग अगर महिलाओं से संबंधित सामान या बहुमूल्य रत्नों का व्यापार करते हैं, तो उन्हें अवश्य ही सफलता मिलती है। ब्यूटीशियन, गायक, घर की साज-सज्जा या अन्य रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोग अवश्य ही सफलता वाले होते हैं। विवाह से संबंधित हर करियर भी आप ही के लिए है।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र
मनोरंजन, खेल और कला से संबंधित क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग अवश्य ही सफलता प्राप्त करते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे धार्मिक संस्थानों के मुखिया या पुजारी, परोपकार करने वाले, दान-पुण्य के कार्य से जुड़े, शादी-विवाह से संबंधित सलाह देने वाले या अंतरराष्ट्रीय मसलों से संबंधित लोग भी सफलता प्राप्त करते हैं।
हस्त नक्षत्र
गहने बनाने वाले लोग, सेहत से संबंधित कार्य करने वाले, हास्य कलाकार, काल्पनिक कहानियां लिखने वाले, उपन्यासकार, रेडियो या टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का संबंध अगर हस्त नक्षत्र से है, तो उन्हें अवश्य ही सफलता मिलती है।
चित्रा नक्षत्र
अपना बिजनेस चलाने वाले, घर की साज-सज्जा, गहने बनाने, फैशन डिजाइनर, मॉडल्स, कॉस्मेटिक, वास्तु-फेंगशुई, ग्राफिक आर्टिस्ट, सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, स्टेज आर्टिस्ट, गायक- इन क्षेत्रों में कार्यरत लोग सफलता प्राप्त अवश्य करते हैं।
स्वाति नक्षत्र
व्यवसाय चलाने वाले, गायक, वाद्य यंत्र बजाने वाले, अध्ययन कार्य में संलिप्त, स्वतंत्र कार्य करने वाले, सामाजिक सेवा में लिप्त लोग सफल होते हैं। इसके अलावा न्यूज रीडर, कम्प्यूटर्स और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग सफलता पाते हैं।
विशाखा नक्षत्र
शराब, फैशन, कला और साथ ही बोलने संबंधित क्षेत्रों में कार्य करने वाले ओग सफलता हासिल करते हैं। इसके अलावा सफल राजनेता, खिलाड़ी, धार्मिक नेता, नर्तक, सैनिक, आलोचक व अपराधियों का संबंध भी इसी नक्षत्र से है।
अनुराधा नक्षत्र
सम्मोहन क्रिया में लिप्त, ज्योतिष शास्त्री, सिनेमा संबंधित क्षेत्र, फोटोग्राफर, फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर, औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित, वैज्ञानिक, गणितज्ञ, डेटा एक्सपर्ट, अंकशास्त्र विशेषज्ञ, खदानों में काम करने वाले, विदेश व्यापार से संबंधित लोग सफलता प्राप्त करते हैं।
ज्येष्ठा नक्षत्र
नीति निर्माण से संबंधित क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग, सरकारी अधिकारी, रिपोर्टर्स, रेडियो जॉकी, न्यूज रीडर, टॉक शो होस्ट, वक्ता, काला जादू करने वाले, जासूस, माफिया, सर्जन, हस्त कारीगर, एथलीट्स आदि क्षेत्रों से संबंधित लोग सफलता प्राप्त करते हैं।
मूल नक्षत्र
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों के लिए दवाइयों से संबंधित क्षेत्र, न्याय, जासूसी, रक्षा व अध्ययन जैसे कार्य सफलता दिलवाएंगे। इसके अलावा वक्ता, सार्वजनिक नेता, सब्जियों के व्यापारी, अंगरक्षक, मल्लयुद्ध करने वाले, गणितज्ञ, सोने की खदान में काम करने वाले व घुड़सवार भी सफल होते हैं।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
शिप संबंधी उद्योग में काम करने वाले प्रेरण, अध्यापक, भाषण देने वाले, फैशन एक्सपर्ट्स, कच्चे सामान का विक्रय करने वाले, बालों की सजावट देखने वाले, तरल पदार्थों का कार्य करने वाले लोग सफलता प्राप्त करते हैं।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
ज्योतिष, वकील, सरकारी अधिकारी, सेना में कार्यरत, अध्ययनकर्ता, सुरक्षा कार्य, व्यापारी, प्रबंधक, क्रिकेट खिलाड़ी, राजनेता और उत्तरदायित्व निभाने वाले कार्यों को करने वाले लोग सफल होते हैं।
श्रवण नक्षत्र
किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले अध्यापक, वक्ता, बौद्धिक, छात्र, भाषाविद, कहानीकार, हास्य अभिनेता, गायन से संबंधित क्षेत्र से जुड़े लोग, टेलीफोन ऑपरेटर्स, मनोवैज्ञानिक व यातायात से संबंधित क्षेत्र में कार्यरत लोग सफलतम होते हैं।
धनिष्ठा नक्षत्र
गायन, वादन, नृत्य, म्यूजिक बैंड व इन सबसे संबंधित क्षेत्र के लोग सफलता पाते हैं। इसके अलावा मनोरंजन उद्योग, रचनात्मक क्षेत्र, कवि, ज्योतिष शास्त्री व प्रेत आत्माओं को बुलाने वाले लोग सफलता हासिल करते हैं।
शतभिषा नक्षत्र
ड्रग्स या दवाइयों से संबंधित क्षेत्र में काम करने वाले लोग सफलता प्राप्त करते हैं। सर्जन व मदिरा से जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत लोग भी सफलता पाते हैं।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र
मृत्यु से संबंधित किसी भी व्यवसाय से जुड़े लोग सफल होते हैं। कॉफिन बनाने, कब्र खोदने व अंतिम संस्कार से संबंधित सामान का व्यापार करने वाले सफलता पाते हैं। इसके साथ-साथ आतंकवादी, हथियार बनाने व काला जादू करने वाले लोग भी सफलता पाते हैं।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
योग और ध्यान से संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत लोग सफलता प्राप्त करते हैं। तंत्र-मंत्र करने वाले और रूहानी ताकतों से संपर्क स्थापित करने वाले लोगों को सफलता अवश्य मिलती है। इसके अलावा दान-पुण्य करने वाले लोग भी सफल होते हैं।
रेवती नक्षत्र
सम्मोहन क्रिया करने वाले लोग, जादूगर, गायक, कलाकार, आर्टिस्ट, हास्य कलाकार, मनोरंजन करने वाले व कंस्ट्रक्शन बिजनेस से जुड़े लोग सफलता हासिल करते हैं।
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Saturday, 19 March 2022
क्या आपकी कुण्डली में राजनीति योग है
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राजनीति के लिए कौन से ग्रह होते हैं जिम्मेदार
ज्योतिष विद्या के अनुसार 4 ग्रह किसी भी व्यक्ति को कुशल और चालाक राजनेता बना सकते हैं।
राहु
ज्योतिष में राहु को राजनीति का ग्रह माना गया है। यदि किसी की कुंडली में राहु का संबंध दशम भाव से हो या यह स्वयं दशम में हो तो व्यक्ति कुशल और प्रखर राजनेता बनता है।
गुरु
राजनीति का कारक दूसरा ग्रह गुरु होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु उच्च हो और दशम से संबंध रखे तो व्यक्ति एक अच्छा राजनेता बनता है।
बुध
कुंडली में बुध मजबूत होने पर व्यक्ति एक अच्छा वक्ता होने के साथ उसके अंदर राजनीति की अच्छी समझ होती है।
सूर्य
सूर्य मान-सम्मान और यश का कारक है। सूर्य लग्न, चौथा, नवम या दशम में हो तो व्यक्ति राजनीति में उच्च पद प्राप्त करता है।
कुंडली का लग्न भाव और राजनीति कनेक्शन
कुंडली के पहले भाव या घर को लग्न भाव कहा जाता है। इस घर में जो राशि होती है, कुंडली उसी लग्न की मानी जाती है।
मेष लग्न
अगर किसी जातक की कुंडली मेष लग्न की हो और इसके सूर्य, मंगल, शनि और राहु शुभ हो तो व्यक्ति राजनेता बनता है।
वृषभ लग्न
वृषभ लग्न की कुंडली राहु के साथ शुक्र भी शुभ हो तो राजनीति में प्रखरता आती है।
मिथुन लग्न
मिथुन लग्न की कुंडली में शनि, सूर्य, बुध अच्छी स्थिति में होने से व्यक्ति राजनीति में नाम कमाता है।
कर्क लग्न
कर्क लग्न की कुंडली में शनि, मंगल, राहु, सूर्य, बुध लाभ की स्थिति में हो तो राजनीति में यश मिलता है।
सिंह लग्न
सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, मंगल, राहु के कारण व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है।
कन्या लग्न
बुध के साथ सूर्य, राहु, गुरु, शनि शुभ हों तो व्यक्ति राजनीति में रुचि लेता है और सफल होता है।
तुला लग्न
सूर्य, गुरु, शनि, मंगल की वजह से राजनीति में अपार सफलता पाता है।
वृश्चिक लग्न
मंगल, गुरु, शनि, चंद्र, राहु के कारण व्यक्ति नेता बनता है।
धनु लग्न
सूर्य, बुध, शुक्र की शुभ स्थिति के कारण व्यक्ति नेता बनता है।
मकर लग्न -
राहु, बुध, शुक्र के शुभ योगों से व्यक्ति राजनीति में प्रवेश करता है।
कुंभ लग्न
सूर्य, शुक्र, राहु की अच्छी स्थिति व्यक्ति को राजनीति के क्षेत्र मेंं महारत हासिल होती है।
मीन लग्न
चंद्र, शनि, मंगल, शुक्र के कारण राजनीति में सफलता मिलती है।
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Tuesday, 28 January 2020
अंक ज्योतिषी के अनुसार नामांक, और मूलअंक, भय्गयंक फल
अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक भाग्यांक और नामांक
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ज्योतिष और वास्तु
अंक ज्योतिष कि व्याख्या
अंक अपने सभी रुपो में हमारी जिन्दगी से एक या अनेक तरह से जुड़े हुए है | हमारे जन्म दिनान्क में अंक है, हमारे नाम में अंक छिपा हुआ है और हमारे काम या व्यवसाय के नाम में अंक छुपा है | जब किसी माह के किसी दिन कोई घटना घटती है तो वह एक अंक में सिमट जाती है | इसी तरीके से हर साल का एक अंक होता है | अंक शास्त्र भविष्य कथन विज्ञान का एक प्रकार है जिसमे अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है | अंक शास्त्र के अनुसार लोगो के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है | कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनिक ने अंक शास्त्र एक नये विशाल क्षेत्र तक पहुँचाया है | अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जीवन मार्ग अंक, जन्म अंक, व्यक्तित्व अंक, कार्मिक चक्र अंक आदि |इसमें यह भी सिध्दान्त है कि जन्मांक में किसी अंक कि उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति का व्यवहार कैसा होगा | अपने व्यक्तित्व को पहचानने के लिए इस विधा के भेद को जाने |
मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है ।
भाग्यांक - DD : MM : YYYY के कुल योग को भाग्यांक कहते है।
मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है।
अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है।
इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
आइये जाने किस अंक का कौन स्वामी है :-
जन्म तारीख
मूलांक
मूलांक का स्वामी
1
10
19
28
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक -1
का स्वामी सूर्य है
2
11
20
29
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक -2
का स्वामी चंद्रमा।
3
12
21
30
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक-3
का स्वामी गुरू।
4
13
22
31
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 4
का स्वामी- राहु।
5
14
23
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 5
का स्वामी बुध।
6
15
24
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक -6
का स्वामी शुक्र।
7
16
25
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7-
का स्वामी केतु।
8
17
26
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8-
का स्वामी- शनि।
9
18
27
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 9-
का स्वामी मंगल।
आइये जाने भाग्यशाली अंक, अंको के रंग और शुभ दिशा-
@.मूलांक 1 :- यह अंक स्वतंत्र व्यक्तित्व का धनी है। इससे संभावित अंह का बोध, आत्म निर्भरता, प्रतिज्ञा, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं विशिष्ट व्यक्तित्व दृष्टि गोचर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं।
जिस व्यक्ति का जन्म समय 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य हो, का प्रभाव सूर्य के नियंत्रण में होता है, इनके लिए शुभ तिथि 1,10,19 एवं 28 तारीख है. चार अंक से इनका जबरदस्त आकर्षण होता है. इनके लिए शुभ दिन रविवार एवं सोमवार है, तो शुभ रंग पीला, हरा एवं भूरा है. ये अपने ऑफिस, शयनकक्ष परदे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग इन्हीं रंगों में करें, तो भाग्य पूर्णत: साथ देता है. इस मूलांक के व्यक्ति शासन के शीर्ष पद पर देखे जाते हैं. छह एवं आठ अंक वाले इनके शत्रु हैं. इनकी शुभ दिशा ईशान कोण है.
@.मूलांक 2 :- अंक दो का संबंध मन से है। यह मानसिक आकर्षण, हृदय की भावना, सहानुभूति, संदेह, घृणा एवं दुविधा दर्शाता है। इसका प्रतिनिधित्व चन्द्र को मिला है, इस अंक का स्वामी चंद्रमा है 2,11, 20, 29 तारीख अति शुभ हैं. रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन हैं. सफेद एवं हल्का हरा इनके शुभ रंग हैं.
मूलांक 3 :- इस अंक के स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं .इससे बढ़ोत्तरी, बुद्धि विकास क्षमता, धन वृद्धि एवं सफलता मिलती है। 3, 12, 21 एवं 30 तारीख इनके लिए विशेष शुभ हैं. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. पीला एवं गुलाबी रंग अतिशुभ है. शुभ माह जनवरी एवं जुलाई है. दक्षिण, पश्चिम एवं अग्नि कोण श्रेष्ठ दिशा है.
@.मूलांक 4 :- इस अंक से मनुष्य की हैसियत, भौतिक सुख संपदा, सम्पत्ति, कब्जा, उपलब्धि एवं श्रेय प्राप्त होता है। इसका प्रतिनिधि हर्षल और राहु हैं. 2, 11, 20 एवं 29 तारीख शुभ है. रविवार, सोमवार एवं शनिवार श्रेष्ठ दिन हैं, जिसमें शनिवार सर्वश्रेष्ठ है. नीला एवं भूरा रंग शुभ है.
@.मूलांक 5 :- इस अंक का स्वामी बुध है. शुभ तिथि 5, 14 एवं 23 है. सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. उसमें शुक्रवार सर्वाधिक शुभ है. सफेद, खाकी एवं हल्का एवं हल्का हरा रंग इनके लिए शुभ है. इनके लिए अशुभ अंक 2, 6 और 9 है.
@.मूलांक 6 :- इस अंक का स्वामी शुक्र है. छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम एवं प्रेम-विवाह, आपसी संबंध, सहयोग, सहानुभूति, संगीत, कला, अभिनय एवं नृत्य का परिचायक है।शुभ तिथि माह की 6,15 एवं 24 तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन है जिसमें शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ है. आसमानी, हल्का एवं गहरा नीला एवं गुलाबी रंग शुभ हैं. लाल एवं काले रंग का प्रयोग वर्जित है.
@.मूलांक 7 :- इस अंक का स्वामी केतु है. सात का अंक आपसी ताल मेल, साझेदारी, समझौता, अनुबंध, शान्ति, आपसी सामंजस्य एवं कटुता को जन्म देता है।महीना के 7, 16 एवं 25 तारीख सर्वश्रेष्ठ है. 21 जून से 25 जुलाई तक का समय भी श्रेष्ठ है. रविवार, सोमवार एवं बुधवार श्रेष्ठ हैं. जिसमें सोमवार सर्वश्रेष्ठ है. शुभ रंग हरा, सफेद एवं हल्का पीला है.
@.मूलांक 8 :- इस अंक का स्वामी शनि हैं. 8, 17 एवं 26 तारीख श्रेष्ठ तिथि हैं.शनि का अंक होने से इस अंक से क्षीणता, शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक कमजोरी, क्षति, हानि, पूर्ननिर्माण, मृत्यु, दुःख, लुप्त हो जाना या बहिर्गमन हो जाता है, रविवार, सोमवार एवं शनिवार शुभ हैं. जिसमें शनिवार सर्वाधिक शुभ है. भूरा, गहरा नीला, बैगनी, सफेद एवं काला शुभ रंग है. हृदय एवं वायु रोग इनके प्रभाव क्षेत्र हैं. दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा शुभ हैं.
@.मूलांक 9 :- अंक नौ का स्वामी मंगल है. इस मूलांक के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक है.यह अन्तिम ईकाई अंक होने से संघर्ष, युद्ध, क्रोध, ऊर्जा, साहस एवं तीव्रता देता है। इससे विभक्ति, रोष एवं उत्सुकता प्रकट होती है। इसका प्रतिनिधि मंगल ग्रह है जो युद्ध का देवता है 9, 18 एवं 27 श्रेष्ठ तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ दिन है. गहरा लाल एवं गुलाबी शुभ रंग है. पूर्व, उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा अतिशुभ हैं. हनुमान जी की अराधना श्रेष्ठ है.
@(आपके लिए कौन-सा मेटल लकी )?
नंबर्स का खेल अजीब है। आपका बर्थ नंबर आपके लिए बहुत कुछ कहता है, वह यह भी बताता है कि आपके लिए कौन-सा मेटल शुभ साबित हो सकता है।
मूलांक 1 :-
1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है गोल्ड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से फरवरी, अप्रैल और अगस्त महीने भी नंबर 1 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी गोल्ड लकी है।
मूलांक 2 :-
2, 11 और 20 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है गोल्ड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से मई और जुलाई महीने भी नंबर 2 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी सिल्वर लकी है।
मूलांक 3 :-
3, 12 और 21 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी टिन है गोल्ड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से मार्च और दिसंबर महीने भी नंबर 3 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी टिन लकी है।
मूलांक 4 :-
4, 13, 22 और 31 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है यूरैनियम। न्यूमरॉलजी के हिसाब से फरवरी, अप्रैल और अगस्त महीने भी नंबर 4 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी यूरैनियम लकी है।
मूलांक 5 :-
5, 14 और 23 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है क्विक सिल्वर। न्यूमरॉलजी के हिसाब से जून और सितंबर महीने भी नंबर 5 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी क्विक सिल्वर लकी है।
मूलांक 6 :-
6, 15 और 24 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है कॉपर। न्यूमरॉलजी के हिसाब से मई और अक्टूबर महीने भी नंबर 1 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी कॉपर लकी है।
मूलांक 7 :-
7, 16 और 25 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है यूरैनियम। न्यूमरॉलजी के हिसाब से फरवरी, जुलाई और अगस्त महीने भी नंबर 7 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी यूरैनियम लकी है।
मूलांक 8 :-
8, 17 और 26 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है लेड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से जनवरी और अक्टूबर महीने भी नंबर 8 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी लेड लकी है।
मूलांक 9 :-
9, 18 और 27 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है आयरन। न्यूमरॉलजी के हिसाब से अप्रैल और नवंबर महीने भी नंबर 9 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी लोहा लकी है।
@(राशियाँ, अंक ज्योतिष और भविष्य -)
अंक ज्योतिष और हस्तरेखा विज्ञान दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। जिस प्रकार आत्मा शरीर के बिना अधूरी है, उसी प्रकार अंक ज्योतिष हस्तरेखा विज्ञान के बिना अधूरा है तथा हस्त रेखा विज्ञान, अंक ज्योतिष के बिना अधूरा है।
आमतौर पर ज्योतिषी हाथ की रेखाओं के अवलोकन मात्र से अथवा अंक विज्ञान की गणना मात्र से ही किसी भी व्यक्ति का भविष्य बता देते हैं, मगर मेरे विचार में हमें दोनों विज्ञानों के गहन अवलोकन पश्चात ही कोई निर्णय देना चाहिए। ज्योतिष से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर हम पाठकों से प्राप्त सामग्री यहाँ दे रहे हैं। ये रचनाएँ लेखकों के अपने अनुभव और विचार हैं। संपादक की इनसे कोई सहमति नहीं है।
आइए देखें, अंक ज्योतिष के आधार पर किसी व्यक्ति का भविष्य किस तरह ज्ञात किया जा सकता है। पहले हम राशियों के क्रम के बारे में जानें।
@(राशि क्रम)
मेष-1 वृष -2 मिथुन-3
कर्क-4 सिंह-5 कन्या-6
तुलाा-7 वृश्चिक-8 धनु-9
चूँकि 1 से 9 तक के अंक के बाद के अंक ज्योतिष में पुनरावृत्ति होती है,
अतः हम 9 के बाद के वाले अंक को पुनः उसी क्रम में रखेंगे-
मकर 10 = 1+0 = 1
कुंभ 11 = 1+1 = 2
मीन 12 = 1+2 =3
नोट- चन्द्र व सूर्य मात्र एक-एक राशि के ही स्वामी हैं जैसे- कर्क का चन्द्र व सिंह का सूर्य। अतः इन्हें एकराशि स्वामी भी कहा जाता है। शेष को द्विराशि स्वामी कहा जाता है।
@(राशियाँ क्रम सहयोगी अथवा शुभ अंक)
मेष+वृश्चिक 1 + 8 = 9
वृष +तुला 2 + 7 = 9
मिथुन+कन्या 3 + 6 = 9
कर्क 4 = 4
सिंह 5 = 5
धनु+ मीन 9+3 = 12= 1+2 =3
मकर+कुंभ 1+2 = 3
अतः स्पष्ट है कि मेष+वृश्चिक (1+8 = 9 योग) के स्वामी मंगल का अंक 9 है तथा दोनों राशियों के क्रम का योग भी 9 आ रहा है, अतः इस प्रकार दोनों राशि नामों का शुभ अंक 9 हुआ।
स्पष्ट है कि मेष और वृश्चिक में मित्रता का संबंध होगा। ये दोनों मित्र होने के साथ-साथ आपसी विचारों में भी समान होंगे। इन राशियों के व्यक्ति यदि साथ मिलकर कोई व्यवसाय करें तो लाभ होगा।
अतः हम यह भी कह सकते हैं कि मेष+वृश्चिक जिनका स्वामी मंगल है का प्रभाव उनके ऊपर जीवन भर रहेगा और यदि इनका भाग्यांक भी 9 आ रहा है, तो यह इन दोनों के लिए अतिशुभ होगा। इसी प्रकार हम अन्य ग्रहों के बारे में भी जान सकते हैं।
यदि हम शुभ दिन या माह ज्ञात करना चाहें तो यह बिलकुल आसान होगा।
जैसे- मेष+वृश्चिक का स्वामी मंगल हुआ अतः मंगलवार शुभ होगा। उसी प्रकार यदि अंक ज्ञात हो तो भी शुभ दिन ज्ञात किया जा सकता है।
माना किसी व्यक्ति का जन्म 2 फरवरी को हुआ है। अतः 2 अंक का स्वामी चन्द्र हुआ, इसलिए सोमवार शुभ दिन होगा। इसी के साथ ही उस व्यक्ति का फरवरी माह बराबर का भाग्यशाली हुआ, क्योंकि माह के क्रम में फरवरी दूसरे (2) स्थान पर आ रहा है।
यदि एक ही स्वामी वाले दो राशियों, नामों के व्यक्तियों का स्वामी, अंक व शुभांक (मूलांक + भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक) एक ही आता है, तो उनकी मित्रता अटल रहेगी। ऐसे पति-पत्नियों के विचारों में भी समानता होगी।
@(शुभ अंक निकालने की विधि-)
सूत्र : शुभांक = (मूलांक +भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक)
शुभांक निकालने की तीन पद्धतियाँ हैं।
(1) सैफेरियल पद्धति।
(2) कीरो पद्धति ।
(3) अँगरेजी पद्धति।
हम यहाँ सैफेरियल पद्धति का प्रयोग करेंगे, क्योंकि सटीक परिणाम निकालने हेतु अधिकतर ज्योतिषी इसी पद्धति का प्रयोग करते हैं।
शुभांक निकालने हेतु जन्म तिथि, माह, सन् का ज्ञान आवश्यक है।
उदाहरणार्थ- यहाँ हम किसी अ का शुभांक निकालते हैं। मान लीजिए अ का जन्म 11-2-1942 को हुआ। अतः
रमेश का जन्म 11-2-1942 को हुआ था। अतः
मूलांक = 11 = 1 +1 = 2
अतः जन्मतिथि का मूलांक 2 हुआ।
अब भाग्यांक निकालने के लिए जन्मतिथि सहित माह एवं सन् सबको जोड़ लिया जाएगा।
जैसे भाग्यांक = 11.2.1942
1+1+2+1+9+4+2
= 20 = 2+0 = 2
अतः इनका भाग्यांक (2) भी मूलांक (2) के साथ बराबर का भाग्यशाली हुआ।
नामांक निकालने के लिए अँगरेजी वर्णमाला के अक्षरों को क्रमसंख्या दी गई है जो इस प्रकार है-
सैफेरियल पद्धति-
छ-1, ळ-2, भ-3,घ-4, ङ-5, ख-6, क्ष-7, --8, '-9, व-1,
ण-2, र्ि -3, ष-4, श-5, '-6, ×-7, ऊ-8, इ-9, झ-1, ्-2,
-3, फ-4, उ-5, ठ-6, ए-7, ढ-8 .
सैफेरियल पद्धति से नामांक निकालने के लिए प्रसिद्ध नाम को अँगरेजी अक्षर में लिखा जाएगा।
AMITABH BACHCHAN
1492128 21383815
योग- 27 31
27+31 द58
5+8 द 13 द1+3द4
अतः नामांक द4
अब हम स्तूपांक निकालेंगे। स्तूपांक निकालने के लिए प्रसिद्ध नाम को अँगरेजी में लिखकर उसके अक्षरों की क्रमसंख्या को नामांक निकालने की तरह ही लिखते हैं-
AMITABH BACHCHAN
1492128 21383815
स्तूपांक निकालने के लिए पहले को दूसरे से, दूसरे को तीसरे से, इसी प्रकार हम चौदहवें तक गुणा करते चले जाएँगे और अंतिम अंक छोड़ देंगे। यही क्रम नीचे भी जारी रहेगा। अंत में जो अंक बचेगा वही स्तूपांक होगा।
AMITABH BACHCHAN
1492128 21383815
499227 7236668
99945 456999
9992 22399
999 4469
99 976
9 स्तूपांक
अब शुभांक ज्ञात करना सरल है।
शुभांक = मूलांक + भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक
= 2 + 2 + 4 + 9
= 17
= 1+7 = 8
अतः अमिताभ बच्चन का शुभ अंक आठ (8) आया।
इस प्रकार चलचित्र क्षेत्र में पदार्पण करने वालों के लिए मूलांक 2, 4, 8, 9 उत्तम होता है। अतः उक्त क्षेत्र का शीर्षक इन अंकों से प्रभावित हो रहा हो तो अति शुभ होगा।
संयोगवश अमिताभ बच्चन के साथ ये सभी संलग्न हैं।
जैसे - मूलांक -2, भाग्यांक - 2, नामांक - 4, स्तूपांक - 9 और शुभांक - 8।
यही कारण है कि लगातार 12 फिल्में फ्लॉप देने के बाद 13वीं फिल्म उनकी सुपर हिट हुई। अंक 13 का योग 1+3 = 4 हुआ। अतः 4 अंक ने 13वीं फिल्म 'जंजीर' सुपर हिट कर दी।
आगे हम एक विचित्र पहलू और देखते हैं-
JANZIR
815899
योग 40 = 4
अतः जंजीर फिल्म का योग भी 4 हुआ।
यह फिल्म सन् 1973 में बनी थी अर्थात 1+9+7+3 =20 = 2+0 = 2। इसका मूलांक 2 आ रहा है- जो अमितजी का मूलांक और भाग्यांक नम्बर है।
इस प्रकार हम उपरोक्त विधि से किसी भी व्यक्ति का शुभांक ज्ञात कर सकते हैं। हमें एक बात याद रखनी चाहिए कि जिस व्यक्ति का शुभांक, तिथि, वार, माह, वर्ष सभी का एक ही अंक आ रहा है, तो वह समय उस व्यक्ति के लिए शुभ ही शुभ होगा।
मूलांक 2 के लिए 1 अशुभ माना गया है, अतः यदि किसी व्यक्ति (या अमितजी जिनका मूलांक -2 है) के लिए यदि तिथि, वार, माह, वर्ष सभी एक से संबंधित हों तो वह समय अमितजी के लिए अशुभ ही अशुभ होगा। यदि किसी व्यक्ति की जन्मतिथि ज्ञात न हो तो उस व्यक्ति के प्रसिद्ध नाम से नामांक निकालकर उसका शुभ अंक ज्ञात किया जा सकता है, परन्तु यह सामान्य फल ही देता है।
अंक विज्ञान के अनुसार धन संबंधी कार्य कब करें
अंक विज्ञान के अनुसार धन संबंधी कार्य कब करें ? भाग्यांक द्वारा आप अपनी आर्थिक स्थितियों एवं गतिविधियों को सुनियोजित कर सकते हैं अर्थात् धन संबंधी कार्य उस दिन या उस समय करें जो भाग्यांक के अनुकूल हो।
धन संबंधी कार्यों के लिए भाग्यांक निकालने के लिए जन्म दिन और जन्म समय को जानना आवश्यक है। इस विधि में जन्म समय में केवल जन्म के घंटे के ज्ञान की आवश्यकता होती है, मिनट आदि का कोई महत्व नहीं होता।
उदाहरण के लिए,
यदि किसी का जन्म प्रातः काल 6ः30 पर हुआ है तो यह समझा जाएगा कि जन्म 6ः00 और 7ः00 बजे के बीच हुआ। सायंकाल 7ः30 बजे जन्म हुआ हो तो 19ः00 और 20ः00 बजे के बीच का समझा जाएगा।
इस संदर्भ में एक तालिका यहां प्रस्तुत है।
इसके अनुसार जो अंक जातक के जन्म समय के घंटे के सामने होगा, वही उसका भाग्यांक होगा और वही समय उसके धन-संबंधी कार्यों के लिए शुभ होगा। तालिका में कुछ अंकों की छाप गहरी है और कुछ की हल्की। गहरी छाप वाले अंक सकारात्मक समय और हल्की छाप वाले नकारात्मक समय के द्योतक हैं। सकारात्मक घंटे अंकों को सौभाग्य सूचक व शक्तिशाली बनाते हैं, अतः वे जातक के लिए नकारात्मक घंटों से अधिक शुभ होंगे। वैसे जातक का जन्म सकारात्मक घंटे में हुआ हो या नकारात्मक घंटे में, उस घंटे से संबंधित अंक ही उस जातक का भाग्यांक होगा।
उदाहरण के लिए,
यदि जातक का जन्म सोमवार को प्रातः काल 6 और 7 बजे के बीच हुआ हो तो उसका भाग्यांक 5 होगा। इस प्रकार, उसका 5 अंक के अवधिकाल में कोई विशेष कार्य करना फलदायक सिद्ध होगा। सकारात्मक अवधि स्वाभाविक तौर पर धन संबंधी या अन्य रचनात्मक कार्यों के लिए सर्वोंŸाम होती है। नकारात्मक अवधि अध्ययन और शोधकार्य आरंभ करने तथा घोड़ों की रेस जैसे कार्यों के लिए शुभ होती है। यह अवधि अतःप्रेरणा शक्ति के लिए अधिक बली होती है। सकारात्मक अवधि रचनात्मक और सक्रियता के कार्यों के लिए अधिक उपयुक्त होती है। ऊपर वर्णित उदाहरण का भाग्यांक 5 है। इस भाग्यांक वाले जातक के लिए शुभ अवधि है सोमवार को सुबह 6ः00 से 17ः00 तक और रविवार को सुबह 2ः00 से 3ः00 तक सकारात्मक और रात्रि 9ः00 से 10ः00 तक नकारात्मक। सोमवार को ही 8ः00 से 9ः00 तक सकारात्मक, मंगलवार को सुबह 3ः00 से 4ः00 तक सकारात्मक, रात्रि 10ः00 से 11ः00 तक नकारात्मक, बुधवार को रात के 12 से 1ः00 तक सकारात्मक, सुबह 7ः00 से 8ः00 तक नकारात्मक, दोपहर 2ः 00 से 3ः00 तक सकारात्मक और रात 9ः00 से 10ः00 तक नकारात्मक, बृहस्पतिवार को सायं 6ः00 से 7ः00 तक सकारात्मक, शुक्रवार को सुबह 1ः00 से 2ः00 तक नकारात्मक, 8ः00 से 9ः00 तक सकारात्मक दोपहर 3ः00 से 4ः00 तक नकारात्मक, रात 10ः00 से 11ः00 तक सकारात्मक, शनिवार को सुबह 5ः00 से 6ः00 तक नकारात्मक और शाम 7ः00 से 8ः00 तक नकारात्मक। इसी विधि का प्रयोग अन्य भाग्यांकों के लिए भी करना चाहिए। इस प्रकार, उपयुक्त समय का चयन कर आप भी धन संबधी कार्यों में शुभता लाकर धनी व सफल हो सकते हैं।
(मूलांक)*****
किसी भी व्यक्ति की जन्म तारीख उसका मूलांक होता है.
जैसे कि 2 जुलाई को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2 होता है तथा 14 सितम्बर वाले का 1+4 = 5.
(भाग्यांक)******
किसी भी व्यक्ति की सम्पूर्ण जन्म तारीख के योग को घटा कर एक अंक की संख्या को उस व्यक्ति विशेष का भाग्यांक कहते हैं,
जैसे कि 2 जुलाई 1966 को जन्मे व्यक्ति का भाग्यांक 2+07+1+9+6+6= 31 = 3+1= 4, होगा.
मूलांक तथा भाग्यांक स्थिर होते हैं, इनमें परिवर्तन सम्भव नही. क्योंकि किसी भी तरीके से व्यक्ति की जन्म तारीख बदली नही जा सकती.
सौभाग्य अंक
व्यक्ति का एक और अंक होता है जिसे सौभाग्य अंक कहते हैं.
यह नम्बर परिवर्तनशील है.
व्यक्ति के नाम के अक्षरो के कुल योग से बनने वाले अंक को सौभाग्य अंक कहा जाता है,
जैसे कि मान लो किसी व्यक्ति का नाम RAMAN है, तो उसका सौभाग्य अंक R=2, A=1, M=4, A=1, एंव N=5 = 2+1+4+1+5 =13 =1+3 =4 होगा.
यदि किसी व्यक्ति का सौभाग्य अंक उसके अनुकूल नही है तो उसके नाम के अंको में घटा जोड करके सौभाग्य अंक को परिवर्तित कर सकते हैं, जिससे कि वह उस व्यक्ति के अनुकूल हो सके.
सौभाग्य अंक का सीधा सम्बन्ध मूलांक से होता है. व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव मूलांक का होता है. चूंकि मूलांक स्थिर अंक होता है तो वह व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव को दर्शाता है तथा मूलांक का तालमेल ही सौभाग्य अंक से बनाया जाता है.
व्यक्ति के जीवन में उतार-चढाव का कारण सौभाग्य अंक होता है. उदाहरण के लिए मान लो कि हम किसी शहर में जाकर नौकरी/ व्यवसाय करना चाहते हैं, तो हमें उस शहर का शुभांक मालूम करना होगा फिर उस शुभांक को स्वंय के सौभाग्य अंक से तुलना करेंगे. यदि दोनो अंको में बेहतर ताल-मेल है अर्थात दोनो अंक आपस में मित्र ग्रुप के है तो वह शहर आपके अनुकूल होगा, और यदि दोनो अंक एक दूसरे से शत्रुवत व्यवहार रखते हैं तो उस शहर में आपके कार्य की हानि होगी.
अब हमारे सामने दो विकल्प हैं, एक तो हम उस शहर विशेष को ही त्याग दें तथा अन्य किसी शहर में चले जायें, यदि एसा करना सम्भव न हो तो दूसरे विकल्प के रुप में हम अपने नाम के अक्षरो में इस प्रकार परिवर्तन करें कि वो उस शहर विशेष से भली भांति तालमेल बैठा लें. यही सबसे सरल तरीका है.
इस प्रकार हम अंक ज्योतिष के माध्यम से अपने जीवन को सुखी एंव समृद्ध बना सकते है एंव दुख व कष्टो को कम कर सकते हैं.
अंक इंसानी जिंदगी में अहं भूमिका निभाते हैं। भविष्य की जानकारी देने वाला ज्योतिष शास्त्र तो पूरी तरह अंक-विज्ञान पर ही आधारित है। वैसे तो सारे ही अंक महत्वपूर्ण हैं किन्तु किसी व्यक्ति विशेष के लिये कुछ विशेष कारणों से किसी अंक को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। वास्तव में अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है। इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अंकज्योतिष शास्त्र के अनुसार केवल एक ही नाम व अंक किसी एक व्यक्ति का स्वामी हो सकता है। जातक जीवन में अपने अंकों के प्रभाव के अनुसार ही अवसर व कठिनाइयों का सामना करता है। अंकज्योतिष शास्त्र में कोई भी अंक भाग्यशाली या दुर्भाग्यपूर्ण नहीं हो सकता, जैसे कि अंक-7 को भाग्यशाली व अंक -13 को दुर्भाग्यपूर्ण समझा जाता है। यह संयोगवश उपजी भ्रांतिपूर्ण धारणा है।
(अंक ज्योतिष से विवाह-)********
अंकशास्त्र में मुख्य रूप से नामांक
मूलांक और भाग्यांक इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फलादेश किया जाता है. विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है.
अंक ज्योतिष भविष्य जानने की एक विधा है. अंक ज्योतिष से ज्योतिष की अन्य विधाओं की तरह भविष्य और सभी प्रकार के ज्योंतिषीय प्रश्नों का उत्तर ज्ञात किया जा सकता है. विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषय में भी अंक ज्योतिष और उसके उपाय काफी मददगार साबित होते हैं.
अंक ज्योंतिष अपने नाम के अनुसार अंक पर आधारित है. अंक शास्त्र के अनुसार सृष्टि के सभी गोचर और अगोचर तत्वों अपना एक निश्चत अंक होता है. अंकों के बीच जब ताल मेल नहीं होता है तब वे अशुभ या विपरीत परिणाम देते हैं. अंकशास्त्र में मुख्य रूप से नामांक, मूलांक और भाग्यांक इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फलादेश किया जाता है. विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है. अगर वर और वधू के अंक आपस में मेल खाते हैं तो विवाह हो सकता है. अगर अंक मेल नहीं खाते हैं तो इसका उपाय करना होता है ताकि अंकों के मध्य मधुर सम्बन्ध स्थापित हो सके.
वैदिक ज्योतिष एवं उसके समानांतर ज्योतिष एवं उसके समानांतर चलने वाली ज्योतिष विधाओं में वर वधु के वैवाहिक जीवन का आंकलन करने के लिए जिस प्रकार से कुण्डली से गुण मिलाया जाता ठीक उसी प्रकार अंकशास्त्र में अंकों को मिलाकर वर वधू के वैवाहिक जीवन का आंकलन किया जाता है.
अंकशास्त्र से वर वधू का गुण मिलान-**********
अंकशास्त्र में वर एवं वधू के वैवाहिक गुण मिलान के लिए, अंकशास्त्र के प्रमुख तीन अंकों में से नामांक ज्ञात किया जाता है. नामांक ज्ञात करने के लिए दोनों के नामों को अंग्रेजी के अलग अलग लिखा जाता है. नाम लिखने के बाद सभी अक्षरों के अंकों को जोड़ा जाता है जिससे नामांक ज्ञात होता है. ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि अगर मूलक 9 से अधिक हो तो योग से प्राप्त संख्या को दो भागों में बांटकर पुन: योग किया जाता है. इस प्रकार जो अंक आता है वह नामांक होता है. उदाहरण से योग 32 आने पर 3+2=5. वर का अंक 5 हो और कन्या का अंक 8 तो दोनों के बीच सहयोगात्मक सम्बन्ध रहेगा, अंकशास्त्र का यह नियम है.
वर वधू के नामांक का-
अंकशास्त्र के नियम के अनुसार अगर वर का नामांक 1 है और वधू का नामांक भी एक है तो दोनों में समान भावना एवं प्रतिस्पर्धा रहेगी जिससे पारिवारिक जीवन में कलह की स्थिति होगी.
कन्या का नामांक 2 होने पर किसी कारण से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है.
वर 1 नामांक का हो और कन्या तीन नामांक की तो उत्तम रहता है दोनों के बीच प्रेम और परस्पर सहयोगात्मक सम्बन्ध रहता है.
कन्या 4 नामंक की होने पर पति पत्नी के बीच अकारण विवाद होता रहता है और जिससे गृहस्थी में अशांति रहती है. पंचम नामंक की कन्या के साथ गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है. सप्तम और नवम नामाक की कन्या भी 1 नामांक के वर के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन का आनन्द लेती है जबकि षष्टम और अष्टम नामांक की कन्या और 1 नमांक का वर होने पर वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आती है.
वर का नामांक 2 हो और कन्या 1 व 7 नामांक की हो तब वैवाहिक जीवन के सुख में बाधा आती है. 2नामांक का वर इन दो नामांक की कन्या के अलावा अन्य नामांक वाली कन्या के साथ विवाह करता है तो वैवाहिक जीवन आनन्दमय और सुखमय रहता है. तीन नामांक की कन्या हो और वर 2 नामांक का तो जीवन सुखी होता है परंतु सुख दुख धूप छांव की तरह होता है. वर 3 नामांक का हो और कन्या तीन, चार अथवा पांच नामांक की हो तब अंकशास्त्र के अनुसार वैवाहिक जीवन उत्तम नहीं रहता है. नामांक तीन का वर और 7 की कन्या होने पर वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख लगा रहता है. अन्य नामांक की कन्या का विवाह 3 नामांक के पुरूष से होता है तो पति पत्नी सुखी और आनन्दित रहते हैं.
4अंक का पुरूष हो और कन्या 2, 4, 5 अंक की हो तब गृहस्थ जीवन उत्तम रहता है . चतुर्थ वर और षष्टम या अष्टम कन्या होने पर वैवाहिक जीवन में अधिक परेशानी नहीं आती है. 4अंक के वर की शादी इन अंकों के अलावा अन्य अंक की कन्या से होने पर गृहस्थ जीवन में परेशानी आती है . नामांक के वर के लिए 1, 2, 5, 6, 8 नामांक की कन्या उत्तम रहती है. चतुर्थ और सप्तम नामांक की कन्या से साथ गृहस्थ जीवन मिला जुला रहता है जबकि अन्य नामांक की कन्या होने पर गृहस्थ सुख में कमी आती है. षष्टम नामांक के वर के लिए 1एवं 6 अंक की कन्या से विवाह उत्तम होता है. 3, 5, 7, 8 एवं 9 नामांक की कन्या के साथ गृहस्थ जीवन सामान्य रहता है और 2 एवं चार नामांक की कन्या के साथ उत्तम वैवाहिक जीवन नहीं रह पाता .
वर का नामांक 7 होने पर कन्या अगर 1, 3, 6, नामांक की होती है तो पति पत्नी के बीच प्रेम और सहयोगात्मक सम्बन्ध होता है. कन्या अगर 5, 8 अथवा 9 नामंक की होती है तब वैवाहिक जीवन में थोड़ी बहुत परेशानियां आती है परंतु सब सामान्य रहता है. अन्य नामांक की कन्या होने पर पति पत्नी के बीच प्रेम और सहयोगात्मक सम्बन्ध नहीं रह पाता है. आठ नामांक का वर 5, 6 अथवा 7 नामांक की कन्या के साथ विवाह करता है तो दोनों सुखी होते हैं. 2अथवा 3नामांक की कन्या से विवाह करता है तो वैवाहिक जीवन सामान्य बना रहता है जबकि अन्य नामांक की कन्या से विवाह करता है तो परेशानी आती है . 9 नामांक के वर के लिए 1, 2, 3, 6 एवं 9 नामांक की कन्या उत्तम होती है जबकि 5 एवं 7 नामांक की कन्या सामान्य होती है . 9 नामांक के वर के लिए 4 और 8 नामांक की कन्या से विवाह करना अंकशास्त्र की दृष्टि से शुभ नही होता है .
@(अंक ज्योतिष और विवाह)*****
जानें कब होगा विवाह
जानें कब होगा विवाह पं. सूर्य प्रकाश गोस्वामी सर्व प्रथम विवाह योग्य लड़के लड़की की जन्म तारीख के आधार पर उनका मूलांक ज्ञात कर लेते हैं। तदुपरांत तालिका संखया 1 से उस मूलांक की किस वर्ष के मूलांक के साथ समानता है, को देखकर विवाह का वर्ष सहज ही जाना जा सकता है। समस्त मूलांकों में से मूलांक 8 सबसे अधिक विवाह आदि में अड़चन अथवा विलंब का कारण बनता है । जो युवक अथवा युवती इससे प्रभावित होते हैं, उनके विवाह में रूकावटें अथवा अड़चने अधिक आती हैं और विवाह में विलंब अवश्य होता है। जब जन्म माह और वर्ष का 8-3-4-6-9 अंकों के साथ संयोग होता है, तब विवाह में विलंब तथा अड़चने आती हैं। साथ ही विवाह के बाद पारिवारिक अशांति भी बनी रहती हैं। जब 8-3-6-9 अंकों में से दो अथवा तीन अंकों का सुयोग होता है, तो विवाह विलंब से होता है।
अंक ज्योतिष भी भविष्य जानने की और भविष्य को और बेहतर करने की एक अच्छी विधा है। इस विधा के द्वारा भी ज्योतिष की अन्य विधाओं की तरह भविष्य और सभी प्रकार के ज्योंतिषीय प्रश्नों का उत्तर पाया जा सकता है। आज हम यहां बात करने जा रहे हैं। अंकज्योतिष की विवाह संस्कार में प्रयुक्त होने वाली भूमिका की। विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषय में अंक ज्योतिष और उसके उपाय काफी मददगार साबित होते हैं। लेकिन सामान्यत: विवाह के प्रकरण में अंकज्योतिषी वर वधू के मूलांक की आपसी मित्रता को देखने के बाद विवाह को उचित या अनुचित होने का प्रमाण पत्र दे देते हैं। यहां पर मैं यह नहीं कह रहा कि ऐसा सभी अंकशास्त्री करते हैं लेकिन ऐसा करने वालों का प्रतिशत अधिक है। वास्तव में विवाह जैसे मामले में अंक ज्योतिष के तीनों पैमानों का प्रयोग करना उत्तम परिणाम देने वाला रहता है। वो तीन पैमाने मूलांक (Root Number), भाग्यांक (Destiny Number) और नामांक (Name Number) हैं। विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है। यदि इन तीनों का मिलान सकारात्मक रहे तो वैवाहिक जीवन के सुखद रहने की सम्भावना प्रबल होती है।
यद्यपि मेरा यह आलेख सबके लिए उपयोगी है लेकिन फिर भी यह उन लोगों के अधिक उपयोगी सिद्ध होगा जिन्हें अपने जन्म का सही समय नहीं पता हो। क्योकि वैदिक ज्योतिष में बिना सही समय के सटीक मिलान में व्यवधान आता है। इसके अलावा ये विधा उन लोंगों के लिए आशा की किरण साबित हो सकती है जिनका मिलाप वैदिक ज्योतिष के अनुसार उचित नहीं आ रहा है। यहां एक बात स्पष्ट कर दूं कि मैं वैदिक ज्योतिष को अंक ज्योतिष की तुलना में कमजोर नहीं कह रहा हूं। यहां मैं केवल इतना कह रहा हूं कि यदि वैदिक ज्योतिष के अनुसार मिलान ठीक न हो लेकिन अंकज्योतिष की तीनों कसौटियों के अनुसार विवाह उचित हो तो सुखद दाम्पत्य की कल्पना की जा सकती है। इसके अलावा यह आलेख उन लोगों के लाभप्रद सिद्ध हो सकता है जिन्हें उनकी जन्मतिथि उत्यादि की जानकारी बिल्कुल न हो। ऐसे में यदि कोई अपने नामाक्षर के नक्षत्र के अनुसार गुण मिलान करने के अलावा, अंकज्योतिष के अनुसार नामांक मिलान करा कर विवाह करता है तो भी सुखद दाम्पत्य की कल्पना की जा सकती है।
अपने नाम के अनुसार अंकज्योंतिष अंको पर आधारित एक ज्योतिषीय विधा है। अंकज्योंतिष के अनुसार सृष्टि के सभी गोचर और अगोचर तत्वों का अपना एक निश्चत अंक होता है। जिन अंकों के बीच मित्रता होती है उनसे सम्बंधित तत्त्व वालों के बीच अच्छा तालमेल होता है इसके विपरीत जिन अंकों में मित्रता नहीं होती है उनसे सम्बंधित तत्त्व वालों के बीच तालमेल नहीं हो पाता। अंकज्योंतिष मुख्यत: मूलांक, भाग्यांक और नामांक इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फल कथन किया जाता है। यदि विवाह के मामले पर बात की जाय तो वर और वधू के अंकों के आपसी मेल के आधार पर उनका विवाह कराया जा सकता है। कभी-कभी कुछ ऐसे प्रेम करने वाले भी मिल जाते हैं जो अपने प्रेम पात्र को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। ऐसे में यदि उनका सम्यक गुण मिलान, मूलांक या भाग्यांक अंक मिलान नहीं हो पाता तो वे इन सबको नजर अंदाज करने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन ऐसे विवाह का हश्र ठीक नहीं होता है। ऐसे में अंकज्योतिष कुछ मददगार सिद्ध हो सकती है। ऐसे में अन्य ज्योतिषीय उपायों के साथ दोनों के नाम की स्पेलिंग में कुछ ऐसा बदलाव किया जाता है जिससे दोनों के नामांक एक दूसरे की मित्रता वाले हो जाएं।
@(अंक शास्त्र से वर वधू का गुण मिलान- )*****
सबसे पहले वर और वधू के मूलांकों का मिलान किया जाता है। जिससे उनके रहन-सहन एवं विचारधारा में सामंजस्य बना रहे। इसके बाद उनके भाग्यांकों का मिलान किया जाता है जिससे उनके मिलन से एक दूसरे की होने वाली भाग्योन्नति का पता चलता है। इसके बाद उनके नामांकों का मिलान किया जाता है जिससे उनके जीवन के सभी क्षेत्रों पर पडने वाले प्रभाव का पता चलता है।
(मूलांक क्या है?)
मूलांक जन्म की तारीख के योग को कहा जाता है जैसे यदि किसी का जन्म किसी भी महीने और साल की 1 तारीख को हुआ है तो मूलांक 1 होगा ऐसे ही 2 तारीख को हुआ तो मूलांक 2 हुआ, जन्म 9 तारीख को हुआ तो मूलांक 9 हुआ। इसके आगे की जितनी भी तारीखें हैं उनका योग कर लेना चाहिए जैसे यदि जन्म 24 तारीख को हुआ तो मूलांक 2+4=6 होगा।
@( भाग्यांक क्या है?
भाग्यांक जन्म की तारीख, महीने और साल के महायोग को कहा जाता है जैसे यदि किसी का जन्म 19 सितम्बर 1992 को हुआ है तो उसका भाग्यांक 1+9+9+1+9+9+2=4 होगा।
नामांक क्या है?
नामांक ज्ञात करने के लिए वर वधू दोनों के नामों को अंग्रेजी में अलग अलग लिखना चाहिए। प्रत्येक अक्षर का एक अंक होता है अत: नाम लिखने के बाद सभी अक्षरों के अंकों को जोड़ा जाता है जिससे नामांक ज्ञात होता है। जैसे यदि किसी का नाम विशाल है तो अंग्रेजी में उसका नाम लिखा जाएगा VISHAL, यहां कीरो मेथड से V का अंक 6,I का अंक 1, S का अंक 3, H का अंक 5, A का अंक 1 और L का अंक 3 होगा। अब VISHAL के सभी अक्षरांको को जोडा जाएगा। जिसका नामांक 6+1+3+5+1+3=19 हुआ अब 1 और 9 को जोडा जाएगा यानी 1+9=10 हुआ। यह योग भी दो अंकों में है अत: इन्हें फिर से आपसे में जोडना चाहिए जो कि 1+0=1 होगा। अत: विशाल का नामांक 1 हुआ।
यहां पर ध्यान रखने योग्य बात यह है कि अगर मूलांक, भाग्यांक या नामांक 9 से अधिक हो तो योग से प्राप्त संख्या को दो भागों में बांटकर पुन: योग किया जाता है। ऐसा तब तक किया जाता है जब तक कि वह एक अंक का न हो जाय।
उपरोक्त उदाहरण के माध्यम से यदि यह पूछा जाय कि विशाल नामक व्यक्ति, जिसका जन्म 19 सितम्बर 1992 को हुआ उसका मूलांक, भाग्यांक और नामांक क्या है? इसका उत्तर यह है कि उसका मूलांक1, भाग्यांक 4, और नामांक 1 है।
मूलांक, भाग्यांक और नामांक मिलान फल:
@*(सारणी:-अंक)*****
यहां पर संक्षिप्त में यह समझ लेना है कि जिसका जो अंक अर्थात मूलांक, भाग्यांक या नामांक है यदि उसके जीवन साथी या प्रेम पात्र का अंक उसके अतिमित्र के कालम वाला है तो उनका दाम्पत्य जीवन बहुत अच्छा रहेगा। यदि मित्र अंक वाला होगा तो दाम्पत्य जीवन अच्छा रहेगा। यदि सम अंक वाला होगा तो दाम्पत्य जीवन सामान्य रहेगा अर्थात कुछ विसंगतियां रह सकती हैं लेकिन निर्वाह होता रहेगा। जबकि अंको में आपसी शत्रुता होने पर दाम्पत्य जीवन कष्टकारी रह सकता है।
उदाहारण -आइए इस बात को इस उदाहारण के माध्यम से समझ लेते हैं। आइए जानते हैं कि 1 अंक वाले वर के लिए विभिन्न अंक वाली कन्याएं कैसी रहेंगी। अंकशास्त्र के नियम के अनुसार अगर वर का अंक 1 है और वधू का अंक भी एक है तो दोनों में समान भावना एवं प्रतिस्पर्धा रहेगी जिससे पारिवारिक जीवन में कलह की स्थिति होगी। कन्या का अंक 2 होने पर सामान्यतय: दाम्पत्य जीवन सुखद रहता है। वर का अंक 1 हो और कन्या का तीन तो दाम्पत्य जीवन सुखद रहता है। दोनों के बीच प्रेम और परस्पर सहयोगात्मक सम्बन्ध रहता है। कन्या का 4 होने पर पति पत्नी के बीच अकारण विवाद होता रहता है और जिससे गृहस्थी में अशांति रहती है. 5 अंक वाली कन्या के साथ मौखिक वाद-विवाद होने की सम्भावना रहती है। 6 अंक वाली कन्या 1 अंक के वर के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन का आनन्द लेती है 7 अंक वाली कन्या के साथ 1 अंक के वर का वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। वहीं 1 अंक के वर का विवाह 8 अंक वाली कन्या से होने पर वैवाहिक जीवन में सुख की कमी रहती है। जबकि 9 अंक वाली कन्या 1 अंक के वर के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन का आनन्द लेती है। इसी तरह हम अन्य अंकों को भी समझ सकते हैं।
उपरोक्त उदाहरण में हमने जहां पर अंक लिखा है उसमें तीनों कसौटियों को शामिल करना है। तीनों कसौटियां यानि कि मूलांक, भाग्यांक और नामांक। उपरोक्त सारणी तीनों ही स्थितियों विचारणीय होगी। यदि वर और कन्या के मूलांक, भाग्यांक और नामांक तीनों में मित्रता हो तो दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी होता है, यदि दो में मित्रता हो तो सामान्यत: ठीक रहता है और यदि केवल एक की मित्रता हो तो विवादों के बाद किसी तरह निर्वाह हो सकता है लेकिन यदि तीनों कसौटियां विपरीत परिणाम दर्शा रहीं हों तो विवाह से बचना चाहिए। जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि इनमें से एक कसौटी यानी कि नामांक को सुधारा जा सकता है। अत: जिनका दाम्पत्य जीवन दुखी हो इस विधा से उसमें बेहतरी लाई जा सकती है।
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ज्योतिष और वास्तु
अंक ज्योतिष कि व्याख्या
अंक अपने सभी रुपो में हमारी जिन्दगी से एक या अनेक तरह से जुड़े हुए है | हमारे जन्म दिनान्क में अंक है, हमारे नाम में अंक छिपा हुआ है और हमारे काम या व्यवसाय के नाम में अंक छुपा है | जब किसी माह के किसी दिन कोई घटना घटती है तो वह एक अंक में सिमट जाती है | इसी तरीके से हर साल का एक अंक होता है | अंक शास्त्र भविष्य कथन विज्ञान का एक प्रकार है जिसमे अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है | अंक शास्त्र के अनुसार लोगो के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है | कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनिक ने अंक शास्त्र एक नये विशाल क्षेत्र तक पहुँचाया है | अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जीवन मार्ग अंक, जन्म अंक, व्यक्तित्व अंक, कार्मिक चक्र अंक आदि |इसमें यह भी सिध्दान्त है कि जन्मांक में किसी अंक कि उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति का व्यवहार कैसा होगा | अपने व्यक्तित्व को पहचानने के लिए इस विधा के भेद को जाने |
मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है ।
भाग्यांक - DD : MM : YYYY के कुल योग को भाग्यांक कहते है।
मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है।
अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है।
इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
आइये जाने किस अंक का कौन स्वामी है :-
जन्म तारीख
मूलांक
मूलांक का स्वामी
1
10
19
28
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक -1
का स्वामी सूर्य है
2
11
20
29
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक -2
का स्वामी चंद्रमा।
3
12
21
30
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक-3
का स्वामी गुरू।
4
13
22
31
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 4
का स्वामी- राहु।
5
14
23
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 5
का स्वामी बुध।
6
15
24
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक -6
का स्वामी शुक्र।
7
16
25
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7-
का स्वामी केतु।
8
17
26
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8-
का स्वामी- शनि।
9
18
27
तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 9-
का स्वामी मंगल।
आइये जाने भाग्यशाली अंक, अंको के रंग और शुभ दिशा-
@.मूलांक 1 :- यह अंक स्वतंत्र व्यक्तित्व का धनी है। इससे संभावित अंह का बोध, आत्म निर्भरता, प्रतिज्ञा, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं विशिष्ट व्यक्तित्व दृष्टि गोचर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं।
जिस व्यक्ति का जन्म समय 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य हो, का प्रभाव सूर्य के नियंत्रण में होता है, इनके लिए शुभ तिथि 1,10,19 एवं 28 तारीख है. चार अंक से इनका जबरदस्त आकर्षण होता है. इनके लिए शुभ दिन रविवार एवं सोमवार है, तो शुभ रंग पीला, हरा एवं भूरा है. ये अपने ऑफिस, शयनकक्ष परदे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग इन्हीं रंगों में करें, तो भाग्य पूर्णत: साथ देता है. इस मूलांक के व्यक्ति शासन के शीर्ष पद पर देखे जाते हैं. छह एवं आठ अंक वाले इनके शत्रु हैं. इनकी शुभ दिशा ईशान कोण है.
@.मूलांक 2 :- अंक दो का संबंध मन से है। यह मानसिक आकर्षण, हृदय की भावना, सहानुभूति, संदेह, घृणा एवं दुविधा दर्शाता है। इसका प्रतिनिधित्व चन्द्र को मिला है, इस अंक का स्वामी चंद्रमा है 2,11, 20, 29 तारीख अति शुभ हैं. रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन हैं. सफेद एवं हल्का हरा इनके शुभ रंग हैं.
मूलांक 3 :- इस अंक के स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं .इससे बढ़ोत्तरी, बुद्धि विकास क्षमता, धन वृद्धि एवं सफलता मिलती है। 3, 12, 21 एवं 30 तारीख इनके लिए विशेष शुभ हैं. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. पीला एवं गुलाबी रंग अतिशुभ है. शुभ माह जनवरी एवं जुलाई है. दक्षिण, पश्चिम एवं अग्नि कोण श्रेष्ठ दिशा है.
@.मूलांक 4 :- इस अंक से मनुष्य की हैसियत, भौतिक सुख संपदा, सम्पत्ति, कब्जा, उपलब्धि एवं श्रेय प्राप्त होता है। इसका प्रतिनिधि हर्षल और राहु हैं. 2, 11, 20 एवं 29 तारीख शुभ है. रविवार, सोमवार एवं शनिवार श्रेष्ठ दिन हैं, जिसमें शनिवार सर्वश्रेष्ठ है. नीला एवं भूरा रंग शुभ है.
@.मूलांक 5 :- इस अंक का स्वामी बुध है. शुभ तिथि 5, 14 एवं 23 है. सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. उसमें शुक्रवार सर्वाधिक शुभ है. सफेद, खाकी एवं हल्का एवं हल्का हरा रंग इनके लिए शुभ है. इनके लिए अशुभ अंक 2, 6 और 9 है.
@.मूलांक 6 :- इस अंक का स्वामी शुक्र है. छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम एवं प्रेम-विवाह, आपसी संबंध, सहयोग, सहानुभूति, संगीत, कला, अभिनय एवं नृत्य का परिचायक है।शुभ तिथि माह की 6,15 एवं 24 तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन है जिसमें शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ है. आसमानी, हल्का एवं गहरा नीला एवं गुलाबी रंग शुभ हैं. लाल एवं काले रंग का प्रयोग वर्जित है.
@.मूलांक 7 :- इस अंक का स्वामी केतु है. सात का अंक आपसी ताल मेल, साझेदारी, समझौता, अनुबंध, शान्ति, आपसी सामंजस्य एवं कटुता को जन्म देता है।महीना के 7, 16 एवं 25 तारीख सर्वश्रेष्ठ है. 21 जून से 25 जुलाई तक का समय भी श्रेष्ठ है. रविवार, सोमवार एवं बुधवार श्रेष्ठ हैं. जिसमें सोमवार सर्वश्रेष्ठ है. शुभ रंग हरा, सफेद एवं हल्का पीला है.
@.मूलांक 8 :- इस अंक का स्वामी शनि हैं. 8, 17 एवं 26 तारीख श्रेष्ठ तिथि हैं.शनि का अंक होने से इस अंक से क्षीणता, शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक कमजोरी, क्षति, हानि, पूर्ननिर्माण, मृत्यु, दुःख, लुप्त हो जाना या बहिर्गमन हो जाता है, रविवार, सोमवार एवं शनिवार शुभ हैं. जिसमें शनिवार सर्वाधिक शुभ है. भूरा, गहरा नीला, बैगनी, सफेद एवं काला शुभ रंग है. हृदय एवं वायु रोग इनके प्रभाव क्षेत्र हैं. दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा शुभ हैं.
@.मूलांक 9 :- अंक नौ का स्वामी मंगल है. इस मूलांक के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक है.यह अन्तिम ईकाई अंक होने से संघर्ष, युद्ध, क्रोध, ऊर्जा, साहस एवं तीव्रता देता है। इससे विभक्ति, रोष एवं उत्सुकता प्रकट होती है। इसका प्रतिनिधि मंगल ग्रह है जो युद्ध का देवता है 9, 18 एवं 27 श्रेष्ठ तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ दिन है. गहरा लाल एवं गुलाबी शुभ रंग है. पूर्व, उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा अतिशुभ हैं. हनुमान जी की अराधना श्रेष्ठ है.
@(आपके लिए कौन-सा मेटल लकी )?
नंबर्स का खेल अजीब है। आपका बर्थ नंबर आपके लिए बहुत कुछ कहता है, वह यह भी बताता है कि आपके लिए कौन-सा मेटल शुभ साबित हो सकता है।
मूलांक 1 :-
1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है गोल्ड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से फरवरी, अप्रैल और अगस्त महीने भी नंबर 1 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी गोल्ड लकी है।
मूलांक 2 :-
2, 11 और 20 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है गोल्ड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से मई और जुलाई महीने भी नंबर 2 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी सिल्वर लकी है।
मूलांक 3 :-
3, 12 और 21 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी टिन है गोल्ड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से मार्च और दिसंबर महीने भी नंबर 3 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी टिन लकी है।
मूलांक 4 :-
4, 13, 22 और 31 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है यूरैनियम। न्यूमरॉलजी के हिसाब से फरवरी, अप्रैल और अगस्त महीने भी नंबर 4 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी यूरैनियम लकी है।
मूलांक 5 :-
5, 14 और 23 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है क्विक सिल्वर। न्यूमरॉलजी के हिसाब से जून और सितंबर महीने भी नंबर 5 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी क्विक सिल्वर लकी है।
मूलांक 6 :-
6, 15 और 24 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है कॉपर। न्यूमरॉलजी के हिसाब से मई और अक्टूबर महीने भी नंबर 1 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी कॉपर लकी है।
मूलांक 7 :-
7, 16 और 25 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है यूरैनियम। न्यूमरॉलजी के हिसाब से फरवरी, जुलाई और अगस्त महीने भी नंबर 7 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी यूरैनियम लकी है।
मूलांक 8 :-
8, 17 और 26 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है लेड। न्यूमरॉलजी के हिसाब से जनवरी और अक्टूबर महीने भी नंबर 8 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी लेड लकी है।
मूलांक 9 :-
9, 18 और 27 तारीख को जन्में लोगों के लिए लकी मेटल है आयरन। न्यूमरॉलजी के हिसाब से अप्रैल और नवंबर महीने भी नंबर 9 को रिप्रजेंट करते हैं। इसलिए इन महीनों में जन्मे लोगों के लिए भी लोहा लकी है।
@(राशियाँ, अंक ज्योतिष और भविष्य -)
अंक ज्योतिष और हस्तरेखा विज्ञान दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। जिस प्रकार आत्मा शरीर के बिना अधूरी है, उसी प्रकार अंक ज्योतिष हस्तरेखा विज्ञान के बिना अधूरा है तथा हस्त रेखा विज्ञान, अंक ज्योतिष के बिना अधूरा है।
आमतौर पर ज्योतिषी हाथ की रेखाओं के अवलोकन मात्र से अथवा अंक विज्ञान की गणना मात्र से ही किसी भी व्यक्ति का भविष्य बता देते हैं, मगर मेरे विचार में हमें दोनों विज्ञानों के गहन अवलोकन पश्चात ही कोई निर्णय देना चाहिए। ज्योतिष से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर हम पाठकों से प्राप्त सामग्री यहाँ दे रहे हैं। ये रचनाएँ लेखकों के अपने अनुभव और विचार हैं। संपादक की इनसे कोई सहमति नहीं है।
आइए देखें, अंक ज्योतिष के आधार पर किसी व्यक्ति का भविष्य किस तरह ज्ञात किया जा सकता है। पहले हम राशियों के क्रम के बारे में जानें।
@(राशि क्रम)
मेष-1 वृष -2 मिथुन-3
कर्क-4 सिंह-5 कन्या-6
तुलाा-7 वृश्चिक-8 धनु-9
चूँकि 1 से 9 तक के अंक के बाद के अंक ज्योतिष में पुनरावृत्ति होती है,
अतः हम 9 के बाद के वाले अंक को पुनः उसी क्रम में रखेंगे-
मकर 10 = 1+0 = 1
कुंभ 11 = 1+1 = 2
मीन 12 = 1+2 =3
नोट- चन्द्र व सूर्य मात्र एक-एक राशि के ही स्वामी हैं जैसे- कर्क का चन्द्र व सिंह का सूर्य। अतः इन्हें एकराशि स्वामी भी कहा जाता है। शेष को द्विराशि स्वामी कहा जाता है।
@(राशियाँ क्रम सहयोगी अथवा शुभ अंक)
मेष+वृश्चिक 1 + 8 = 9
वृष +तुला 2 + 7 = 9
मिथुन+कन्या 3 + 6 = 9
कर्क 4 = 4
सिंह 5 = 5
धनु+ मीन 9+3 = 12= 1+2 =3
मकर+कुंभ 1+2 = 3
अतः स्पष्ट है कि मेष+वृश्चिक (1+8 = 9 योग) के स्वामी मंगल का अंक 9 है तथा दोनों राशियों के क्रम का योग भी 9 आ रहा है, अतः इस प्रकार दोनों राशि नामों का शुभ अंक 9 हुआ।
स्पष्ट है कि मेष और वृश्चिक में मित्रता का संबंध होगा। ये दोनों मित्र होने के साथ-साथ आपसी विचारों में भी समान होंगे। इन राशियों के व्यक्ति यदि साथ मिलकर कोई व्यवसाय करें तो लाभ होगा।
अतः हम यह भी कह सकते हैं कि मेष+वृश्चिक जिनका स्वामी मंगल है का प्रभाव उनके ऊपर जीवन भर रहेगा और यदि इनका भाग्यांक भी 9 आ रहा है, तो यह इन दोनों के लिए अतिशुभ होगा। इसी प्रकार हम अन्य ग्रहों के बारे में भी जान सकते हैं।
यदि हम शुभ दिन या माह ज्ञात करना चाहें तो यह बिलकुल आसान होगा।
जैसे- मेष+वृश्चिक का स्वामी मंगल हुआ अतः मंगलवार शुभ होगा। उसी प्रकार यदि अंक ज्ञात हो तो भी शुभ दिन ज्ञात किया जा सकता है।
माना किसी व्यक्ति का जन्म 2 फरवरी को हुआ है। अतः 2 अंक का स्वामी चन्द्र हुआ, इसलिए सोमवार शुभ दिन होगा। इसी के साथ ही उस व्यक्ति का फरवरी माह बराबर का भाग्यशाली हुआ, क्योंकि माह के क्रम में फरवरी दूसरे (2) स्थान पर आ रहा है।
यदि एक ही स्वामी वाले दो राशियों, नामों के व्यक्तियों का स्वामी, अंक व शुभांक (मूलांक + भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक) एक ही आता है, तो उनकी मित्रता अटल रहेगी। ऐसे पति-पत्नियों के विचारों में भी समानता होगी।
@(शुभ अंक निकालने की विधि-)
सूत्र : शुभांक = (मूलांक +भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक)
शुभांक निकालने की तीन पद्धतियाँ हैं।
(1) सैफेरियल पद्धति।
(2) कीरो पद्धति ।
(3) अँगरेजी पद्धति।
हम यहाँ सैफेरियल पद्धति का प्रयोग करेंगे, क्योंकि सटीक परिणाम निकालने हेतु अधिकतर ज्योतिषी इसी पद्धति का प्रयोग करते हैं।
शुभांक निकालने हेतु जन्म तिथि, माह, सन् का ज्ञान आवश्यक है।
उदाहरणार्थ- यहाँ हम किसी अ का शुभांक निकालते हैं। मान लीजिए अ का जन्म 11-2-1942 को हुआ। अतः
रमेश का जन्म 11-2-1942 को हुआ था। अतः
मूलांक = 11 = 1 +1 = 2
अतः जन्मतिथि का मूलांक 2 हुआ।
अब भाग्यांक निकालने के लिए जन्मतिथि सहित माह एवं सन् सबको जोड़ लिया जाएगा।
जैसे भाग्यांक = 11.2.1942
1+1+2+1+9+4+2
= 20 = 2+0 = 2
अतः इनका भाग्यांक (2) भी मूलांक (2) के साथ बराबर का भाग्यशाली हुआ।
नामांक निकालने के लिए अँगरेजी वर्णमाला के अक्षरों को क्रमसंख्या दी गई है जो इस प्रकार है-
सैफेरियल पद्धति-
छ-1, ळ-2, भ-3,घ-4, ङ-5, ख-6, क्ष-7, --8, '-9, व-1,
ण-2, र्ि -3, ष-4, श-5, '-6, ×-7, ऊ-8, इ-9, झ-1, ्-2,
-3, फ-4, उ-5, ठ-6, ए-7, ढ-8 .
सैफेरियल पद्धति से नामांक निकालने के लिए प्रसिद्ध नाम को अँगरेजी अक्षर में लिखा जाएगा।
AMITABH BACHCHAN
1492128 21383815
योग- 27 31
27+31 द58
5+8 द 13 द1+3द4
अतः नामांक द4
अब हम स्तूपांक निकालेंगे। स्तूपांक निकालने के लिए प्रसिद्ध नाम को अँगरेजी में लिखकर उसके अक्षरों की क्रमसंख्या को नामांक निकालने की तरह ही लिखते हैं-
AMITABH BACHCHAN
1492128 21383815
स्तूपांक निकालने के लिए पहले को दूसरे से, दूसरे को तीसरे से, इसी प्रकार हम चौदहवें तक गुणा करते चले जाएँगे और अंतिम अंक छोड़ देंगे। यही क्रम नीचे भी जारी रहेगा। अंत में जो अंक बचेगा वही स्तूपांक होगा।
AMITABH BACHCHAN
1492128 21383815
499227 7236668
99945 456999
9992 22399
999 4469
99 976
9 स्तूपांक
अब शुभांक ज्ञात करना सरल है।
शुभांक = मूलांक + भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक
= 2 + 2 + 4 + 9
= 17
= 1+7 = 8
अतः अमिताभ बच्चन का शुभ अंक आठ (8) आया।
इस प्रकार चलचित्र क्षेत्र में पदार्पण करने वालों के लिए मूलांक 2, 4, 8, 9 उत्तम होता है। अतः उक्त क्षेत्र का शीर्षक इन अंकों से प्रभावित हो रहा हो तो अति शुभ होगा।
संयोगवश अमिताभ बच्चन के साथ ये सभी संलग्न हैं।
जैसे - मूलांक -2, भाग्यांक - 2, नामांक - 4, स्तूपांक - 9 और शुभांक - 8।
यही कारण है कि लगातार 12 फिल्में फ्लॉप देने के बाद 13वीं फिल्म उनकी सुपर हिट हुई। अंक 13 का योग 1+3 = 4 हुआ। अतः 4 अंक ने 13वीं फिल्म 'जंजीर' सुपर हिट कर दी।
आगे हम एक विचित्र पहलू और देखते हैं-
JANZIR
815899
योग 40 = 4
अतः जंजीर फिल्म का योग भी 4 हुआ।
यह फिल्म सन् 1973 में बनी थी अर्थात 1+9+7+3 =20 = 2+0 = 2। इसका मूलांक 2 आ रहा है- जो अमितजी का मूलांक और भाग्यांक नम्बर है।
इस प्रकार हम उपरोक्त विधि से किसी भी व्यक्ति का शुभांक ज्ञात कर सकते हैं। हमें एक बात याद रखनी चाहिए कि जिस व्यक्ति का शुभांक, तिथि, वार, माह, वर्ष सभी का एक ही अंक आ रहा है, तो वह समय उस व्यक्ति के लिए शुभ ही शुभ होगा।
मूलांक 2 के लिए 1 अशुभ माना गया है, अतः यदि किसी व्यक्ति (या अमितजी जिनका मूलांक -2 है) के लिए यदि तिथि, वार, माह, वर्ष सभी एक से संबंधित हों तो वह समय अमितजी के लिए अशुभ ही अशुभ होगा। यदि किसी व्यक्ति की जन्मतिथि ज्ञात न हो तो उस व्यक्ति के प्रसिद्ध नाम से नामांक निकालकर उसका शुभ अंक ज्ञात किया जा सकता है, परन्तु यह सामान्य फल ही देता है।
अंक विज्ञान के अनुसार धन संबंधी कार्य कब करें
अंक विज्ञान के अनुसार धन संबंधी कार्य कब करें ? भाग्यांक द्वारा आप अपनी आर्थिक स्थितियों एवं गतिविधियों को सुनियोजित कर सकते हैं अर्थात् धन संबंधी कार्य उस दिन या उस समय करें जो भाग्यांक के अनुकूल हो।
धन संबंधी कार्यों के लिए भाग्यांक निकालने के लिए जन्म दिन और जन्म समय को जानना आवश्यक है। इस विधि में जन्म समय में केवल जन्म के घंटे के ज्ञान की आवश्यकता होती है, मिनट आदि का कोई महत्व नहीं होता।
उदाहरण के लिए,
यदि किसी का जन्म प्रातः काल 6ः30 पर हुआ है तो यह समझा जाएगा कि जन्म 6ः00 और 7ः00 बजे के बीच हुआ। सायंकाल 7ः30 बजे जन्म हुआ हो तो 19ः00 और 20ः00 बजे के बीच का समझा जाएगा।
इस संदर्भ में एक तालिका यहां प्रस्तुत है।
इसके अनुसार जो अंक जातक के जन्म समय के घंटे के सामने होगा, वही उसका भाग्यांक होगा और वही समय उसके धन-संबंधी कार्यों के लिए शुभ होगा। तालिका में कुछ अंकों की छाप गहरी है और कुछ की हल्की। गहरी छाप वाले अंक सकारात्मक समय और हल्की छाप वाले नकारात्मक समय के द्योतक हैं। सकारात्मक घंटे अंकों को सौभाग्य सूचक व शक्तिशाली बनाते हैं, अतः वे जातक के लिए नकारात्मक घंटों से अधिक शुभ होंगे। वैसे जातक का जन्म सकारात्मक घंटे में हुआ हो या नकारात्मक घंटे में, उस घंटे से संबंधित अंक ही उस जातक का भाग्यांक होगा।
उदाहरण के लिए,
यदि जातक का जन्म सोमवार को प्रातः काल 6 और 7 बजे के बीच हुआ हो तो उसका भाग्यांक 5 होगा। इस प्रकार, उसका 5 अंक के अवधिकाल में कोई विशेष कार्य करना फलदायक सिद्ध होगा। सकारात्मक अवधि स्वाभाविक तौर पर धन संबंधी या अन्य रचनात्मक कार्यों के लिए सर्वोंŸाम होती है। नकारात्मक अवधि अध्ययन और शोधकार्य आरंभ करने तथा घोड़ों की रेस जैसे कार्यों के लिए शुभ होती है। यह अवधि अतःप्रेरणा शक्ति के लिए अधिक बली होती है। सकारात्मक अवधि रचनात्मक और सक्रियता के कार्यों के लिए अधिक उपयुक्त होती है। ऊपर वर्णित उदाहरण का भाग्यांक 5 है। इस भाग्यांक वाले जातक के लिए शुभ अवधि है सोमवार को सुबह 6ः00 से 17ः00 तक और रविवार को सुबह 2ः00 से 3ः00 तक सकारात्मक और रात्रि 9ः00 से 10ः00 तक नकारात्मक। सोमवार को ही 8ः00 से 9ः00 तक सकारात्मक, मंगलवार को सुबह 3ः00 से 4ः00 तक सकारात्मक, रात्रि 10ः00 से 11ः00 तक नकारात्मक, बुधवार को रात के 12 से 1ः00 तक सकारात्मक, सुबह 7ः00 से 8ः00 तक नकारात्मक, दोपहर 2ः 00 से 3ः00 तक सकारात्मक और रात 9ः00 से 10ः00 तक नकारात्मक, बृहस्पतिवार को सायं 6ः00 से 7ः00 तक सकारात्मक, शुक्रवार को सुबह 1ः00 से 2ः00 तक नकारात्मक, 8ः00 से 9ः00 तक सकारात्मक दोपहर 3ः00 से 4ः00 तक नकारात्मक, रात 10ः00 से 11ः00 तक सकारात्मक, शनिवार को सुबह 5ः00 से 6ः00 तक नकारात्मक और शाम 7ः00 से 8ः00 तक नकारात्मक। इसी विधि का प्रयोग अन्य भाग्यांकों के लिए भी करना चाहिए। इस प्रकार, उपयुक्त समय का चयन कर आप भी धन संबधी कार्यों में शुभता लाकर धनी व सफल हो सकते हैं।
(मूलांक)*****
किसी भी व्यक्ति की जन्म तारीख उसका मूलांक होता है.
जैसे कि 2 जुलाई को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2 होता है तथा 14 सितम्बर वाले का 1+4 = 5.
(भाग्यांक)******
किसी भी व्यक्ति की सम्पूर्ण जन्म तारीख के योग को घटा कर एक अंक की संख्या को उस व्यक्ति विशेष का भाग्यांक कहते हैं,
जैसे कि 2 जुलाई 1966 को जन्मे व्यक्ति का भाग्यांक 2+07+1+9+6+6= 31 = 3+1= 4, होगा.
मूलांक तथा भाग्यांक स्थिर होते हैं, इनमें परिवर्तन सम्भव नही. क्योंकि किसी भी तरीके से व्यक्ति की जन्म तारीख बदली नही जा सकती.
सौभाग्य अंक
व्यक्ति का एक और अंक होता है जिसे सौभाग्य अंक कहते हैं.
यह नम्बर परिवर्तनशील है.
व्यक्ति के नाम के अक्षरो के कुल योग से बनने वाले अंक को सौभाग्य अंक कहा जाता है,
जैसे कि मान लो किसी व्यक्ति का नाम RAMAN है, तो उसका सौभाग्य अंक R=2, A=1, M=4, A=1, एंव N=5 = 2+1+4+1+5 =13 =1+3 =4 होगा.
यदि किसी व्यक्ति का सौभाग्य अंक उसके अनुकूल नही है तो उसके नाम के अंको में घटा जोड करके सौभाग्य अंक को परिवर्तित कर सकते हैं, जिससे कि वह उस व्यक्ति के अनुकूल हो सके.
सौभाग्य अंक का सीधा सम्बन्ध मूलांक से होता है. व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव मूलांक का होता है. चूंकि मूलांक स्थिर अंक होता है तो वह व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव को दर्शाता है तथा मूलांक का तालमेल ही सौभाग्य अंक से बनाया जाता है.
व्यक्ति के जीवन में उतार-चढाव का कारण सौभाग्य अंक होता है. उदाहरण के लिए मान लो कि हम किसी शहर में जाकर नौकरी/ व्यवसाय करना चाहते हैं, तो हमें उस शहर का शुभांक मालूम करना होगा फिर उस शुभांक को स्वंय के सौभाग्य अंक से तुलना करेंगे. यदि दोनो अंको में बेहतर ताल-मेल है अर्थात दोनो अंक आपस में मित्र ग्रुप के है तो वह शहर आपके अनुकूल होगा, और यदि दोनो अंक एक दूसरे से शत्रुवत व्यवहार रखते हैं तो उस शहर में आपके कार्य की हानि होगी.
अब हमारे सामने दो विकल्प हैं, एक तो हम उस शहर विशेष को ही त्याग दें तथा अन्य किसी शहर में चले जायें, यदि एसा करना सम्भव न हो तो दूसरे विकल्प के रुप में हम अपने नाम के अक्षरो में इस प्रकार परिवर्तन करें कि वो उस शहर विशेष से भली भांति तालमेल बैठा लें. यही सबसे सरल तरीका है.
इस प्रकार हम अंक ज्योतिष के माध्यम से अपने जीवन को सुखी एंव समृद्ध बना सकते है एंव दुख व कष्टो को कम कर सकते हैं.
अंक इंसानी जिंदगी में अहं भूमिका निभाते हैं। भविष्य की जानकारी देने वाला ज्योतिष शास्त्र तो पूरी तरह अंक-विज्ञान पर ही आधारित है। वैसे तो सारे ही अंक महत्वपूर्ण हैं किन्तु किसी व्यक्ति विशेष के लिये कुछ विशेष कारणों से किसी अंक को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। वास्तव में अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है। इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अंकज्योतिष शास्त्र के अनुसार केवल एक ही नाम व अंक किसी एक व्यक्ति का स्वामी हो सकता है। जातक जीवन में अपने अंकों के प्रभाव के अनुसार ही अवसर व कठिनाइयों का सामना करता है। अंकज्योतिष शास्त्र में कोई भी अंक भाग्यशाली या दुर्भाग्यपूर्ण नहीं हो सकता, जैसे कि अंक-7 को भाग्यशाली व अंक -13 को दुर्भाग्यपूर्ण समझा जाता है। यह संयोगवश उपजी भ्रांतिपूर्ण धारणा है।
(अंक ज्योतिष से विवाह-)********
अंकशास्त्र में मुख्य रूप से नामांक
मूलांक और भाग्यांक इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फलादेश किया जाता है. विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है.
अंक ज्योतिष भविष्य जानने की एक विधा है. अंक ज्योतिष से ज्योतिष की अन्य विधाओं की तरह भविष्य और सभी प्रकार के ज्योंतिषीय प्रश्नों का उत्तर ज्ञात किया जा सकता है. विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषय में भी अंक ज्योतिष और उसके उपाय काफी मददगार साबित होते हैं.
अंक ज्योंतिष अपने नाम के अनुसार अंक पर आधारित है. अंक शास्त्र के अनुसार सृष्टि के सभी गोचर और अगोचर तत्वों अपना एक निश्चत अंक होता है. अंकों के बीच जब ताल मेल नहीं होता है तब वे अशुभ या विपरीत परिणाम देते हैं. अंकशास्त्र में मुख्य रूप से नामांक, मूलांक और भाग्यांक इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फलादेश किया जाता है. विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है. अगर वर और वधू के अंक आपस में मेल खाते हैं तो विवाह हो सकता है. अगर अंक मेल नहीं खाते हैं तो इसका उपाय करना होता है ताकि अंकों के मध्य मधुर सम्बन्ध स्थापित हो सके.
वैदिक ज्योतिष एवं उसके समानांतर ज्योतिष एवं उसके समानांतर चलने वाली ज्योतिष विधाओं में वर वधु के वैवाहिक जीवन का आंकलन करने के लिए जिस प्रकार से कुण्डली से गुण मिलाया जाता ठीक उसी प्रकार अंकशास्त्र में अंकों को मिलाकर वर वधू के वैवाहिक जीवन का आंकलन किया जाता है.
अंकशास्त्र से वर वधू का गुण मिलान-**********
अंकशास्त्र में वर एवं वधू के वैवाहिक गुण मिलान के लिए, अंकशास्त्र के प्रमुख तीन अंकों में से नामांक ज्ञात किया जाता है. नामांक ज्ञात करने के लिए दोनों के नामों को अंग्रेजी के अलग अलग लिखा जाता है. नाम लिखने के बाद सभी अक्षरों के अंकों को जोड़ा जाता है जिससे नामांक ज्ञात होता है. ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि अगर मूलक 9 से अधिक हो तो योग से प्राप्त संख्या को दो भागों में बांटकर पुन: योग किया जाता है. इस प्रकार जो अंक आता है वह नामांक होता है. उदाहरण से योग 32 आने पर 3+2=5. वर का अंक 5 हो और कन्या का अंक 8 तो दोनों के बीच सहयोगात्मक सम्बन्ध रहेगा, अंकशास्त्र का यह नियम है.
वर वधू के नामांक का-
अंकशास्त्र के नियम के अनुसार अगर वर का नामांक 1 है और वधू का नामांक भी एक है तो दोनों में समान भावना एवं प्रतिस्पर्धा रहेगी जिससे पारिवारिक जीवन में कलह की स्थिति होगी.
कन्या का नामांक 2 होने पर किसी कारण से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है.
वर 1 नामांक का हो और कन्या तीन नामांक की तो उत्तम रहता है दोनों के बीच प्रेम और परस्पर सहयोगात्मक सम्बन्ध रहता है.
कन्या 4 नामंक की होने पर पति पत्नी के बीच अकारण विवाद होता रहता है और जिससे गृहस्थी में अशांति रहती है. पंचम नामंक की कन्या के साथ गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है. सप्तम और नवम नामाक की कन्या भी 1 नामांक के वर के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन का आनन्द लेती है जबकि षष्टम और अष्टम नामांक की कन्या और 1 नमांक का वर होने पर वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आती है.
वर का नामांक 2 हो और कन्या 1 व 7 नामांक की हो तब वैवाहिक जीवन के सुख में बाधा आती है. 2नामांक का वर इन दो नामांक की कन्या के अलावा अन्य नामांक वाली कन्या के साथ विवाह करता है तो वैवाहिक जीवन आनन्दमय और सुखमय रहता है. तीन नामांक की कन्या हो और वर 2 नामांक का तो जीवन सुखी होता है परंतु सुख दुख धूप छांव की तरह होता है. वर 3 नामांक का हो और कन्या तीन, चार अथवा पांच नामांक की हो तब अंकशास्त्र के अनुसार वैवाहिक जीवन उत्तम नहीं रहता है. नामांक तीन का वर और 7 की कन्या होने पर वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख लगा रहता है. अन्य नामांक की कन्या का विवाह 3 नामांक के पुरूष से होता है तो पति पत्नी सुखी और आनन्दित रहते हैं.
4अंक का पुरूष हो और कन्या 2, 4, 5 अंक की हो तब गृहस्थ जीवन उत्तम रहता है . चतुर्थ वर और षष्टम या अष्टम कन्या होने पर वैवाहिक जीवन में अधिक परेशानी नहीं आती है. 4अंक के वर की शादी इन अंकों के अलावा अन्य अंक की कन्या से होने पर गृहस्थ जीवन में परेशानी आती है . नामांक के वर के लिए 1, 2, 5, 6, 8 नामांक की कन्या उत्तम रहती है. चतुर्थ और सप्तम नामांक की कन्या से साथ गृहस्थ जीवन मिला जुला रहता है जबकि अन्य नामांक की कन्या होने पर गृहस्थ सुख में कमी आती है. षष्टम नामांक के वर के लिए 1एवं 6 अंक की कन्या से विवाह उत्तम होता है. 3, 5, 7, 8 एवं 9 नामांक की कन्या के साथ गृहस्थ जीवन सामान्य रहता है और 2 एवं चार नामांक की कन्या के साथ उत्तम वैवाहिक जीवन नहीं रह पाता .
वर का नामांक 7 होने पर कन्या अगर 1, 3, 6, नामांक की होती है तो पति पत्नी के बीच प्रेम और सहयोगात्मक सम्बन्ध होता है. कन्या अगर 5, 8 अथवा 9 नामंक की होती है तब वैवाहिक जीवन में थोड़ी बहुत परेशानियां आती है परंतु सब सामान्य रहता है. अन्य नामांक की कन्या होने पर पति पत्नी के बीच प्रेम और सहयोगात्मक सम्बन्ध नहीं रह पाता है. आठ नामांक का वर 5, 6 अथवा 7 नामांक की कन्या के साथ विवाह करता है तो दोनों सुखी होते हैं. 2अथवा 3नामांक की कन्या से विवाह करता है तो वैवाहिक जीवन सामान्य बना रहता है जबकि अन्य नामांक की कन्या से विवाह करता है तो परेशानी आती है . 9 नामांक के वर के लिए 1, 2, 3, 6 एवं 9 नामांक की कन्या उत्तम होती है जबकि 5 एवं 7 नामांक की कन्या सामान्य होती है . 9 नामांक के वर के लिए 4 और 8 नामांक की कन्या से विवाह करना अंकशास्त्र की दृष्टि से शुभ नही होता है .
@(अंक ज्योतिष और विवाह)*****
जानें कब होगा विवाह
जानें कब होगा विवाह पं. सूर्य प्रकाश गोस्वामी सर्व प्रथम विवाह योग्य लड़के लड़की की जन्म तारीख के आधार पर उनका मूलांक ज्ञात कर लेते हैं। तदुपरांत तालिका संखया 1 से उस मूलांक की किस वर्ष के मूलांक के साथ समानता है, को देखकर विवाह का वर्ष सहज ही जाना जा सकता है। समस्त मूलांकों में से मूलांक 8 सबसे अधिक विवाह आदि में अड़चन अथवा विलंब का कारण बनता है । जो युवक अथवा युवती इससे प्रभावित होते हैं, उनके विवाह में रूकावटें अथवा अड़चने अधिक आती हैं और विवाह में विलंब अवश्य होता है। जब जन्म माह और वर्ष का 8-3-4-6-9 अंकों के साथ संयोग होता है, तब विवाह में विलंब तथा अड़चने आती हैं। साथ ही विवाह के बाद पारिवारिक अशांति भी बनी रहती हैं। जब 8-3-6-9 अंकों में से दो अथवा तीन अंकों का सुयोग होता है, तो विवाह विलंब से होता है।
अंक ज्योतिष भी भविष्य जानने की और भविष्य को और बेहतर करने की एक अच्छी विधा है। इस विधा के द्वारा भी ज्योतिष की अन्य विधाओं की तरह भविष्य और सभी प्रकार के ज्योंतिषीय प्रश्नों का उत्तर पाया जा सकता है। आज हम यहां बात करने जा रहे हैं। अंकज्योतिष की विवाह संस्कार में प्रयुक्त होने वाली भूमिका की। विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषय में अंक ज्योतिष और उसके उपाय काफी मददगार साबित होते हैं। लेकिन सामान्यत: विवाह के प्रकरण में अंकज्योतिषी वर वधू के मूलांक की आपसी मित्रता को देखने के बाद विवाह को उचित या अनुचित होने का प्रमाण पत्र दे देते हैं। यहां पर मैं यह नहीं कह रहा कि ऐसा सभी अंकशास्त्री करते हैं लेकिन ऐसा करने वालों का प्रतिशत अधिक है। वास्तव में विवाह जैसे मामले में अंक ज्योतिष के तीनों पैमानों का प्रयोग करना उत्तम परिणाम देने वाला रहता है। वो तीन पैमाने मूलांक (Root Number), भाग्यांक (Destiny Number) और नामांक (Name Number) हैं। विवाह के संदर्भ में भी इन्हीं तीन प्रकार के अंकों के बीच सम्बन्ध को देखा जाता है। यदि इन तीनों का मिलान सकारात्मक रहे तो वैवाहिक जीवन के सुखद रहने की सम्भावना प्रबल होती है।
यद्यपि मेरा यह आलेख सबके लिए उपयोगी है लेकिन फिर भी यह उन लोगों के अधिक उपयोगी सिद्ध होगा जिन्हें अपने जन्म का सही समय नहीं पता हो। क्योकि वैदिक ज्योतिष में बिना सही समय के सटीक मिलान में व्यवधान आता है। इसके अलावा ये विधा उन लोंगों के लिए आशा की किरण साबित हो सकती है जिनका मिलाप वैदिक ज्योतिष के अनुसार उचित नहीं आ रहा है। यहां एक बात स्पष्ट कर दूं कि मैं वैदिक ज्योतिष को अंक ज्योतिष की तुलना में कमजोर नहीं कह रहा हूं। यहां मैं केवल इतना कह रहा हूं कि यदि वैदिक ज्योतिष के अनुसार मिलान ठीक न हो लेकिन अंकज्योतिष की तीनों कसौटियों के अनुसार विवाह उचित हो तो सुखद दाम्पत्य की कल्पना की जा सकती है। इसके अलावा यह आलेख उन लोगों के लाभप्रद सिद्ध हो सकता है जिन्हें उनकी जन्मतिथि उत्यादि की जानकारी बिल्कुल न हो। ऐसे में यदि कोई अपने नामाक्षर के नक्षत्र के अनुसार गुण मिलान करने के अलावा, अंकज्योतिष के अनुसार नामांक मिलान करा कर विवाह करता है तो भी सुखद दाम्पत्य की कल्पना की जा सकती है।
अपने नाम के अनुसार अंकज्योंतिष अंको पर आधारित एक ज्योतिषीय विधा है। अंकज्योंतिष के अनुसार सृष्टि के सभी गोचर और अगोचर तत्वों का अपना एक निश्चत अंक होता है। जिन अंकों के बीच मित्रता होती है उनसे सम्बंधित तत्त्व वालों के बीच अच्छा तालमेल होता है इसके विपरीत जिन अंकों में मित्रता नहीं होती है उनसे सम्बंधित तत्त्व वालों के बीच तालमेल नहीं हो पाता। अंकज्योंतिष मुख्यत: मूलांक, भाग्यांक और नामांक इन तीन विशेष अंकों को आधार मानकर फल कथन किया जाता है। यदि विवाह के मामले पर बात की जाय तो वर और वधू के अंकों के आपसी मेल के आधार पर उनका विवाह कराया जा सकता है। कभी-कभी कुछ ऐसे प्रेम करने वाले भी मिल जाते हैं जो अपने प्रेम पात्र को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। ऐसे में यदि उनका सम्यक गुण मिलान, मूलांक या भाग्यांक अंक मिलान नहीं हो पाता तो वे इन सबको नजर अंदाज करने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन ऐसे विवाह का हश्र ठीक नहीं होता है। ऐसे में अंकज्योतिष कुछ मददगार सिद्ध हो सकती है। ऐसे में अन्य ज्योतिषीय उपायों के साथ दोनों के नाम की स्पेलिंग में कुछ ऐसा बदलाव किया जाता है जिससे दोनों के नामांक एक दूसरे की मित्रता वाले हो जाएं।
@(अंक शास्त्र से वर वधू का गुण मिलान- )*****
सबसे पहले वर और वधू के मूलांकों का मिलान किया जाता है। जिससे उनके रहन-सहन एवं विचारधारा में सामंजस्य बना रहे। इसके बाद उनके भाग्यांकों का मिलान किया जाता है जिससे उनके मिलन से एक दूसरे की होने वाली भाग्योन्नति का पता चलता है। इसके बाद उनके नामांकों का मिलान किया जाता है जिससे उनके जीवन के सभी क्षेत्रों पर पडने वाले प्रभाव का पता चलता है।
(मूलांक क्या है?)
मूलांक जन्म की तारीख के योग को कहा जाता है जैसे यदि किसी का जन्म किसी भी महीने और साल की 1 तारीख को हुआ है तो मूलांक 1 होगा ऐसे ही 2 तारीख को हुआ तो मूलांक 2 हुआ, जन्म 9 तारीख को हुआ तो मूलांक 9 हुआ। इसके आगे की जितनी भी तारीखें हैं उनका योग कर लेना चाहिए जैसे यदि जन्म 24 तारीख को हुआ तो मूलांक 2+4=6 होगा।
@( भाग्यांक क्या है?
भाग्यांक जन्म की तारीख, महीने और साल के महायोग को कहा जाता है जैसे यदि किसी का जन्म 19 सितम्बर 1992 को हुआ है तो उसका भाग्यांक 1+9+9+1+9+9+2=4 होगा।
नामांक क्या है?
नामांक ज्ञात करने के लिए वर वधू दोनों के नामों को अंग्रेजी में अलग अलग लिखना चाहिए। प्रत्येक अक्षर का एक अंक होता है अत: नाम लिखने के बाद सभी अक्षरों के अंकों को जोड़ा जाता है जिससे नामांक ज्ञात होता है। जैसे यदि किसी का नाम विशाल है तो अंग्रेजी में उसका नाम लिखा जाएगा VISHAL, यहां कीरो मेथड से V का अंक 6,I का अंक 1, S का अंक 3, H का अंक 5, A का अंक 1 और L का अंक 3 होगा। अब VISHAL के सभी अक्षरांको को जोडा जाएगा। जिसका नामांक 6+1+3+5+1+3=19 हुआ अब 1 और 9 को जोडा जाएगा यानी 1+9=10 हुआ। यह योग भी दो अंकों में है अत: इन्हें फिर से आपसे में जोडना चाहिए जो कि 1+0=1 होगा। अत: विशाल का नामांक 1 हुआ।
यहां पर ध्यान रखने योग्य बात यह है कि अगर मूलांक, भाग्यांक या नामांक 9 से अधिक हो तो योग से प्राप्त संख्या को दो भागों में बांटकर पुन: योग किया जाता है। ऐसा तब तक किया जाता है जब तक कि वह एक अंक का न हो जाय।
उपरोक्त उदाहरण के माध्यम से यदि यह पूछा जाय कि विशाल नामक व्यक्ति, जिसका जन्म 19 सितम्बर 1992 को हुआ उसका मूलांक, भाग्यांक और नामांक क्या है? इसका उत्तर यह है कि उसका मूलांक1, भाग्यांक 4, और नामांक 1 है।
मूलांक, भाग्यांक और नामांक मिलान फल:
@*(सारणी:-अंक)*****
यहां पर संक्षिप्त में यह समझ लेना है कि जिसका जो अंक अर्थात मूलांक, भाग्यांक या नामांक है यदि उसके जीवन साथी या प्रेम पात्र का अंक उसके अतिमित्र के कालम वाला है तो उनका दाम्पत्य जीवन बहुत अच्छा रहेगा। यदि मित्र अंक वाला होगा तो दाम्पत्य जीवन अच्छा रहेगा। यदि सम अंक वाला होगा तो दाम्पत्य जीवन सामान्य रहेगा अर्थात कुछ विसंगतियां रह सकती हैं लेकिन निर्वाह होता रहेगा। जबकि अंको में आपसी शत्रुता होने पर दाम्पत्य जीवन कष्टकारी रह सकता है।
उदाहारण -आइए इस बात को इस उदाहारण के माध्यम से समझ लेते हैं। आइए जानते हैं कि 1 अंक वाले वर के लिए विभिन्न अंक वाली कन्याएं कैसी रहेंगी। अंकशास्त्र के नियम के अनुसार अगर वर का अंक 1 है और वधू का अंक भी एक है तो दोनों में समान भावना एवं प्रतिस्पर्धा रहेगी जिससे पारिवारिक जीवन में कलह की स्थिति होगी। कन्या का अंक 2 होने पर सामान्यतय: दाम्पत्य जीवन सुखद रहता है। वर का अंक 1 हो और कन्या का तीन तो दाम्पत्य जीवन सुखद रहता है। दोनों के बीच प्रेम और परस्पर सहयोगात्मक सम्बन्ध रहता है। कन्या का 4 होने पर पति पत्नी के बीच अकारण विवाद होता रहता है और जिससे गृहस्थी में अशांति रहती है. 5 अंक वाली कन्या के साथ मौखिक वाद-विवाद होने की सम्भावना रहती है। 6 अंक वाली कन्या 1 अंक के वर के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन का आनन्द लेती है 7 अंक वाली कन्या के साथ 1 अंक के वर का वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। वहीं 1 अंक के वर का विवाह 8 अंक वाली कन्या से होने पर वैवाहिक जीवन में सुख की कमी रहती है। जबकि 9 अंक वाली कन्या 1 अंक के वर के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन का आनन्द लेती है। इसी तरह हम अन्य अंकों को भी समझ सकते हैं।
उपरोक्त उदाहरण में हमने जहां पर अंक लिखा है उसमें तीनों कसौटियों को शामिल करना है। तीनों कसौटियां यानि कि मूलांक, भाग्यांक और नामांक। उपरोक्त सारणी तीनों ही स्थितियों विचारणीय होगी। यदि वर और कन्या के मूलांक, भाग्यांक और नामांक तीनों में मित्रता हो तो दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी होता है, यदि दो में मित्रता हो तो सामान्यत: ठीक रहता है और यदि केवल एक की मित्रता हो तो विवादों के बाद किसी तरह निर्वाह हो सकता है लेकिन यदि तीनों कसौटियां विपरीत परिणाम दर्शा रहीं हों तो विवाह से बचना चाहिए। जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि इनमें से एक कसौटी यानी कि नामांक को सुधारा जा सकता है। अत: जिनका दाम्पत्य जीवन दुखी हो इस विधा से उसमें बेहतरी लाई जा सकती है।
Vastu Guru *Mkpoddar ******
Wp.9333112719.
Astrology or Vastu consultant.
My blog http://vastujyotishsamadhan.blogspot.com.
Monday, 13 January 2020
LOSU GRID or Vastu लोसू ग्रिड और वास्तु
LOSU GRID or Vastu
अंक शास्त्र के अंतर्गत लो-शु वर्ग की रचना सर्वप्रथम चीन में हुई, जिसकी उत्पत्ति के बारे में यह माना जाता है कि 'लो' नामक नदी तट पर एक कछुए की पीठ पर यह रचना प्राप्त हुई। इसका उपयोग चीन के राजाओं व ज्योतिषियों ने कालांतर में मानव जीवन को समृद्ध व सफल बनाने में किया। धीरे-धीरे यह रचना पूरे विश्व में समय के साथ-साथ फैलती चली गई।
(लोशु ग्रिड क्या है : ) Astha Jyotish.
Astrology or Vastu Solutions.
*Vastu Guru Mkpoddar *
Wp.9333112719.
यह 9 कोष्ठकों का 3ग3 खानों वाला एक वर्ग होता है, जिसमें 1 से 9 तक अंक लिखे हुए होते हैं। जन्मतिथि के आधार पर अंकों को इस वर्ग व ग्रिड में बैठाकर देखते हैं। जिस भी अंक की कमी लोशु ग्रिड के आधार पर होती है जीवन में उस अंक से संबंधित दिशा, वस्तु, धातु, कारक आदि प्रभावित क्षेत्रों में कमी रहेगी। अंकों से संबंधित धातु, दिशा आदि के विषय में हमें निम्न सारणी की आवश्यकता पड़ती है। जन्मतिथि के आधार पर जो अंक लोशु ग्रिड में नहीं होता, उस अंक से संबंधित दिशा, व्यक्ति, धातु, कारक आदि को उस व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करवाकर उसकी हर प्रकार की कमियों को पूरा किया जा सकता है। यहां पर भी ध्यान रखना होता है कि जो अंक जन्मतिथि में नहीं है (लोशु ग्रिड) केवल उन्हीं क्षेत्रों में व्यक्ति विशेष को कमी हो ऐसा कदापि नहीं माना जा सकता। क्योंकि बहुत से अन्य कारण भी होंगे जिनका प्रभाव समय के साथ-साथ समाप्त भी होता जाएगा जैसे (किसी की मृत्यु पश्चात् उससे संबंधित अंक का व्यर्थ होना) किसी एक अंक का अधिक बार होना उस व्यक्ति विशेष पर उस अंक से संबंधित तत्व, ग्रह आदि की अधिकता भी दर्शाता है जो कभी-कभी नुक्सान भी दे सकती है अतः ऐसे अंकों हेतु उपाय भी करने होते हैं। अनुपस्थित अंकों हेतु उपाय व सुझाव अंक एक (जल तत्व)- पानी भरा पात्र पूर्व/उ.पू. में रखें। सूर्य को प्रातः ताम्र पात्र से अर्घ्य दें। मछली घर (एक्वेरियम) रखें। उत्तर दिशा में फब्बारा/स्वीमिंग पूल रखें। प्यासे व्यक्तियों को पानी पिलाएं। 1, 10, 28 जन्मतिथि वालों का संग करें, संबंध बनाएं। अंक 2, 5, व 8 (भूमि तत्व) जन्मतिथि पर न होने (अनुपस्थित) पर उपाय- चकोर/वर्गाकार खाने की मेज (डायनिंग टेबल) प्रयोग करें। शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में बनाएं। घर के मध्य में पीली रोशनी (बल्व) लगवाएं। पहाड़ों के चित्र द.प. में लगाएं। एक मुखी रुद्राक्ष/क्रिस्टल माला धारण करें। हरा पिरामिड रखें। अंक 3, 4 (काष्ठ तत्व) हेतु उपाय - मुखय द्वार पर संगीतमय घंटी (विंड चाइम्स्) लगाएं। उत्तर पूर्व दिशा स्वच्छ रखें। पूर्व/दक्षिण - पूर्व में हरी रोशनी लगवाएं। हरे पौधे व हरियाली वाली तस्वीरें पूर्व/दक्षिण-पूर्व में लगवाएं। 3, 12, 30, 13, 22 जन्मतिथि वालों से संबंध बढ़ाएं। अंक 6-7 (धातु तत्व हेतु उपाय) : दाएं हाथ में स्वर्ण (सोना पहनें)। सुनहरी पीली संगीतमय घंटी (विंड चाइम्स्) पश्चिम / उत्तर - पश्चिम/ उत्तर में लगाएं। धातु की बनी वस्तुएं मूर्तियां आदि पश्चिम/उत्तर पश्चिम में रखें। पीले रंग का पिरामिड घर पर रखें। अंक 9 (अग्नि तत्व) : लाल रंग की रोशनी दक्षिण पूर्व में लगाएं। बैठक में फूलों वाले पौधे लगाएं। दक्षिण पूर्व में तंदूर (ओवन) आदि रखें। दक्षिणी दीवार पर लाल रंग की तस्वीर लगाएं। आइए अब इस लोशु चक्र विधि को एक जन्मतिथि पर आजमा कर देखते हैं। किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 30 नवंबर 1977 अर्थात 30, 11, 1977 है इसे लोशु चक्र में लिखने पर हमें यह चार्ट प्राप्त होगा। अनुपस्थित अंक 2, 4, 5, 6, 8 अर्थात् भूमि तत्व (2, 5, 8) 4 (काष्ठ तत्व) तथा 6 (धातु तत्व) है जबकि 1, 3, 7, 9 उपस्थित है जिसमें 1 व 7 अंक की अधिकता है अर्थात् 1 (जल तत्व, 3 (काष्ठ तत्व), 7 (धातु तत्व) व 9 (अग्नि तत्व) इस जातक के जीवन में स्पष्ट है कि जल व धातु तत्व की अधिकता है जबकि भूमि तत्व की कमी है अतः जातक को भूमि तत्व (2, 5, 8) अंकों के उपाय करने चाहिए। इस जातक को विवाह व संतान प्राप्ति के बाद काफी सफलता मिली कारण पति की जन्मतिथि 8 व पुत्री की जन्मतिथि 11 जो कि 2, 8 बनती है अर्थात् भूमि तत्व की कमी पूरी होने से जीवन पहले से अधिक सफल हुआ। लोशु चक्र रहस्यमय अंक ज्योतिष का चक्र है, जिससे जातक के जीवन में वांछनीय बदलाव कर लाभ दिए व लिए जा सकते है।
अंक शास्त्र के अंतर्गत लो-शु वर्ग की रचना सर्वप्रथम चीन में हुई, जिसकी उत्पत्ति के बारे में यह माना जाता है कि 'लो' नामक नदी तट पर एक कछुए की पीठ पर यह रचना प्राप्त हुई। इसका उपयोग चीन के राजाओं व ज्योतिषियों ने कालांतर में मानव जीवन को समृद्ध व सफल बनाने में किया। धीरे-धीरे यह रचना पूरे विश्व में समय के साथ-साथ फैलती चली गई।
(लोशु ग्रिड क्या है : ) Astha Jyotish.
Astrology or Vastu Solutions.
*Vastu Guru Mkpoddar *
Wp.9333112719.
यह 9 कोष्ठकों का 3ग3 खानों वाला एक वर्ग होता है, जिसमें 1 से 9 तक अंक लिखे हुए होते हैं। जन्मतिथि के आधार पर अंकों को इस वर्ग व ग्रिड में बैठाकर देखते हैं। जिस भी अंक की कमी लोशु ग्रिड के आधार पर होती है जीवन में उस अंक से संबंधित दिशा, वस्तु, धातु, कारक आदि प्रभावित क्षेत्रों में कमी रहेगी। अंकों से संबंधित धातु, दिशा आदि के विषय में हमें निम्न सारणी की आवश्यकता पड़ती है। जन्मतिथि के आधार पर जो अंक लोशु ग्रिड में नहीं होता, उस अंक से संबंधित दिशा, व्यक्ति, धातु, कारक आदि को उस व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करवाकर उसकी हर प्रकार की कमियों को पूरा किया जा सकता है। यहां पर भी ध्यान रखना होता है कि जो अंक जन्मतिथि में नहीं है (लोशु ग्रिड) केवल उन्हीं क्षेत्रों में व्यक्ति विशेष को कमी हो ऐसा कदापि नहीं माना जा सकता। क्योंकि बहुत से अन्य कारण भी होंगे जिनका प्रभाव समय के साथ-साथ समाप्त भी होता जाएगा जैसे (किसी की मृत्यु पश्चात् उससे संबंधित अंक का व्यर्थ होना) किसी एक अंक का अधिक बार होना उस व्यक्ति विशेष पर उस अंक से संबंधित तत्व, ग्रह आदि की अधिकता भी दर्शाता है जो कभी-कभी नुक्सान भी दे सकती है अतः ऐसे अंकों हेतु उपाय भी करने होते हैं। अनुपस्थित अंकों हेतु उपाय व सुझाव अंक एक (जल तत्व)- पानी भरा पात्र पूर्व/उ.पू. में रखें। सूर्य को प्रातः ताम्र पात्र से अर्घ्य दें। मछली घर (एक्वेरियम) रखें। उत्तर दिशा में फब्बारा/स्वीमिंग पूल रखें। प्यासे व्यक्तियों को पानी पिलाएं। 1, 10, 28 जन्मतिथि वालों का संग करें, संबंध बनाएं। अंक 2, 5, व 8 (भूमि तत्व) जन्मतिथि पर न होने (अनुपस्थित) पर उपाय- चकोर/वर्गाकार खाने की मेज (डायनिंग टेबल) प्रयोग करें। शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में बनाएं। घर के मध्य में पीली रोशनी (बल्व) लगवाएं। पहाड़ों के चित्र द.प. में लगाएं। एक मुखी रुद्राक्ष/क्रिस्टल माला धारण करें। हरा पिरामिड रखें। अंक 3, 4 (काष्ठ तत्व) हेतु उपाय - मुखय द्वार पर संगीतमय घंटी (विंड चाइम्स्) लगाएं। उत्तर पूर्व दिशा स्वच्छ रखें। पूर्व/दक्षिण - पूर्व में हरी रोशनी लगवाएं। हरे पौधे व हरियाली वाली तस्वीरें पूर्व/दक्षिण-पूर्व में लगवाएं। 3, 12, 30, 13, 22 जन्मतिथि वालों से संबंध बढ़ाएं। अंक 6-7 (धातु तत्व हेतु उपाय) : दाएं हाथ में स्वर्ण (सोना पहनें)। सुनहरी पीली संगीतमय घंटी (विंड चाइम्स्) पश्चिम / उत्तर - पश्चिम/ उत्तर में लगाएं। धातु की बनी वस्तुएं मूर्तियां आदि पश्चिम/उत्तर पश्चिम में रखें। पीले रंग का पिरामिड घर पर रखें। अंक 9 (अग्नि तत्व) : लाल रंग की रोशनी दक्षिण पूर्व में लगाएं। बैठक में फूलों वाले पौधे लगाएं। दक्षिण पूर्व में तंदूर (ओवन) आदि रखें। दक्षिणी दीवार पर लाल रंग की तस्वीर लगाएं। आइए अब इस लोशु चक्र विधि को एक जन्मतिथि पर आजमा कर देखते हैं। किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 30 नवंबर 1977 अर्थात 30, 11, 1977 है इसे लोशु चक्र में लिखने पर हमें यह चार्ट प्राप्त होगा। अनुपस्थित अंक 2, 4, 5, 6, 8 अर्थात् भूमि तत्व (2, 5, 8) 4 (काष्ठ तत्व) तथा 6 (धातु तत्व) है जबकि 1, 3, 7, 9 उपस्थित है जिसमें 1 व 7 अंक की अधिकता है अर्थात् 1 (जल तत्व, 3 (काष्ठ तत्व), 7 (धातु तत्व) व 9 (अग्नि तत्व) इस जातक के जीवन में स्पष्ट है कि जल व धातु तत्व की अधिकता है जबकि भूमि तत्व की कमी है अतः जातक को भूमि तत्व (2, 5, 8) अंकों के उपाय करने चाहिए। इस जातक को विवाह व संतान प्राप्ति के बाद काफी सफलता मिली कारण पति की जन्मतिथि 8 व पुत्री की जन्मतिथि 11 जो कि 2, 8 बनती है अर्थात् भूमि तत्व की कमी पूरी होने से जीवन पहले से अधिक सफल हुआ। लोशु चक्र रहस्यमय अंक ज्योतिष का चक्र है, जिससे जातक के जीवन में वांछनीय बदलाव कर लाभ दिए व लिए जा सकते है।
Thursday, 9 January 2020
अंक ज्योतिष अनुसार विवाह और प्यार
अंकज्योतिष के अनुसार प्यार और विवाह |
(Astha Jyotish asansol)
*Vastu Guru-Mkpoddar *
Wp.9333112719 *
नंबर 1 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 1 लोग सब कुछ में नेतृत्व करना पसंद करते हैं। अंक विज्ञान के विज्ञान के अनुसार, वे अपने साथी पर भी शासन करने की कोशिश करते हैं। आम तौर पर, उन्हें कुछ ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है जिसे वे तैयार नहीं हैं। इसके अलावा, वे समझौता नहीं करते हैं; वे महसूस करते हैं कि उनके पास कुछ असाधारण गुण हैं जिनके कारण वे असाधारण लोगों के साथ प्यार करते हैं। वे भावनात्मक से अधिक व्यावहारिक होते हैं और वे सुंदरता से प्यार करते हैं। प्रेम-निर्माण में, वे अपने साथी पर हावी होते हैं। वे रचनात्मक हैं और वे नई चीजों के साथ प्रयोग करने की कोशिश करते हैं। नंबर 1 के लोग अपने साथी को रिश्ते में वफादार होने की उम्मीद कर सकते हैं।
नंबर 2 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 2 लोग संवेदनशील, कामुक और मूडी होते हैं। उनके लिए, यह हमेशा अपने साथी के साथ मानसिक संबंध के बारे में है। उनके लिए, भावनात्मक कनेक्शन से शारीरिक संबंध कम महत्वपूर्ण है। उनके पास अत्यधिक मूड स्विंग है इसलिए उनके साथी के लिए एक स्थिर मन का होना महत्वपूर्ण है। संख्या 2 लोग केवल अपने साथी के साथ बहुत अच्छी समझ रखते हैं, तो प्यार और विवाह में संतुष्ट हो जाते हैं, सेक्स उनके लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं है। जब प्यार, रोमांस और शादी की बात आती है तो वे अपने दिल का पालन करते हैं।
नंबर 3 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 3 लोग नंबर 1 लोगों के समान होते हैं जब यह प्यार और विवाह के बारे में होता है। वे व्यावहारिक हैं और आमतौर पर अपने साथी पर निर्णय लेने के दौरान अपने दिल का पालन नहीं करेंगे। संख्या 3 लोग निडर और महत्वाकांक्षी हैं। वे अपने स्वयं के कानून बनाते हैं और बहुत आत्म-भ्रमित होते हैं। वे आम तौर पर सबसे अच्छा शादी करना चाहते हैं। वे 2, 6, 7 और 8 जैसी अन्य संख्याओं की तुलना में रोमांटिक नहीं हैं। इसके अलावा, ये लोग अपने साथी के साथ समय बिताने में विश्वास नहीं करते हैं; उनके लिए, उनके करियर का मुख्य महत्व है। यौन जीवन में भी, वे अपने साथी पर हावी होना पसंद करते हैं। वे सभी क्षेत्रों में अपनी श्रेष्ठता साबित करने का प्रयास करते हैं। रिश्ते उनके लिए अच्छा हो सकते हैं यदि दूसरा व्यक्ति इस बात से सहमत होने के लिए तैयार है कि वह दूसरा सर्वश्रेष्ठ है।
नंबर 4 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 4 लोग अपरंपरागत हैं और उनमें से प्रत्येक के बारे में कुछ अद्वितीय है। हालांकि, ज्योतिष के अनुसार, वे सामान्य रूप से रोमांटिक नहीं हैं। वे विवाह के बाहर अधिक रिश्ते रखते हैं, लेकिन केवल यौन आनंद के लिए। संख्या 4 लोग अपने रिश्तों में बहुत समर्पित हैं। भले ही उनके विवाह के बाहर यौन संबंध हों, फिर भी उनके साथी यह पता लगाने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि वे अपने साथी को समर्पित रहते हैं। 22 वें जन्म के लोग आमतौर पर अपने साथी के साथ वफादार होते हैं।
नंबर 5 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
विवाह से पहले 5 लोगों के पास बहुत से रिश्ते हो सकते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि उनके साथी सही हों। थोड़ी देर के बाद, वे अपने साथी के साथ ऊब जाते हैं क्योंकि उन्हें परिवर्तन और मनोरंजन पसंद है। संख्या 5 लोग बहुमुखी हैं और वे प्रयोग करना पसंद करते हैं। वे प्रेम बनाने के नए तरीकों का भी प्रयास करना पसंद करते हैं। रिश्ते में उनके लिए सेक्स महत्वपूर्ण है। उनका दिमाग बहुत तेज़ काम करता है, जिसके कारण वे अपने दिमाग को भी अक्सर बदलते हैं। वे आवेगपूर्ण हैं और संख्या 2 लोगों की तरह एक स्थिर जीवन साथी की जरूरत है। संख्या 8 संख्या 5 के लिए एक अच्छा मैच है। संख्या 5 लोग आम तौर पर प्यार में नहीं जाते हैं और रिश्ते और विवाह की बात करते समय वे व्यावहारिक निर्णय लेते हैं।
नंबर 6 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 6 शुक्र की संख्या है, जिसे प्यार और शांति के ग्रह के रूप में जाना जाता है। जब प्यार और रोमांस की बात आती है तो संख्या 6 लोग आकर्षक और चुंबकीय होते हैं। वे बहुत भावुक होते हैं। इन लोगों के लिए, अपने विवाह में मानसिक और भावनात्मक रूप से जुड़ा होना महत्वपूर्ण है। आम तौर पर, संख्या 6 लोग अपने आकर्षक व्यक्तित्व के कारण विपरीत लिंग के लोगों से घिरे हुए हैं। लोगों को आकर्षित करने की उनकी क्षमता अक्सर अपने साथी को ईर्ष्यालु बना देती है।
नंबर 7 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 7 लोग आम तौर पर कम बात करते हैं, क्योंकि वे सपने देखते हैं और विचारशील होते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे ठंडे हैं और रोमांटिक नहीं हैं। संख्या 7 केतु का प्रतिनिधित्व करता है,
जिसमें संख्या 2 के समान कुछ गुण हैं और यही कारण है कि वे संख्या 2 लोगों के साथ सबसे अच्छे हैं। उन्हें तनाव से बचने और अधिक आराम से रहना चाहिए। संख्या 2 की तरह, विवाह में अपने साथी के साथ संख्या 7 लोगों के लिए भावनात्मक रूप से जुड़ा होना महत्वपूर्ण है। आम तौर पर, संख्या 7 में से अधिकांश लोग वफादार होते हैं जब तक कि वे अपने साथी द्वारा बुरी तरह चोट नहीं खाते। नंबर 2 की तरह, उन्हें एक अच्छा करियर रखने के लिए अपने निजी जीवन में भी खुश होना चाहिए। संख्या 7 लोगों को गलतफहमी को दूर करने के लिए अक्सर अपने भागीदारों के साथ संवाद करना चाहिए।
नंबर 8 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 8 लोग सभी संख्याओं में सबसे वफादार हैं; हालांकि, वे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं क्योंकि उन्हें हर किसी द्वारा बड़े पैमाने पर गलत समझा जाता है। अधिकांश संख्या 8 महिलाएं अपने विवाह के जीवन में पीड़ित हैं। शादी करने से पहले कुंडली से सख्ती से मिलान करने के लिए संख्या 8 महिलाओं को सुझाव दिया जाता है। अपने साथी के प्रति वे वफादार रहते हैं। प्यार और रिश्तों की बात आती है जब वे व्यावहारिक नहीं होते हैं, वे सिर्फ अपने दिल का पालन करते हैं। वे किसी से जुड़ने के लिए बहुत समय लेते हैं, लेकिन एक बार वे जुड़ने के बाद अपने साथी का सम्मान करते हैं। संख्या 8 लोग अक्सर अन्य संख्या 8 और 4 के लिए आकर्षित होते हैं। लेकिन चूंकि ये दोनों संख्याएं संघर्ष लाती हैं, इसलिए दो नंबर 4 या 8 को कभी भी आपस में शादी नहीं करनी चाहिए। संख्या 2 के लोग एक बार जब रिश्ते से बाहर निकलने का फैसला करते हैं, तो कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता है।
नंबर 9 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 9 मंगल का प्रतीक है, जो एक विनाशकारी ग्रह है। इसी प्रकार, संख्या 9 लोग आक्रामकता और ऊर्जा से भरे हुए होते हैं। संख्या 9 लोग भावनात्मक होते हैं, लेकिन दुनिया शायद ही उस पक्ष को देख सकती है। संख्या 9 सेक्स को हमेशा अधिक महत्व देते हैं। संख्या 9 पुरुषों के विवाह के बाहर शारीरिक संबंध होते हैं, जो केवल शारीरिक सुख के लिए हैं और वे भावनात्मक नहीं होते हैं। संख्या 9 लोग अपने साथी के बारे में भावनात्मक होते हैं और अपने परिवारों से जुड़े हुए होते हैं। हालांकि, अगर उन्हें अपने विवाह के बाहर सेक्स का मौका मिलता है, तो वे संकोच नहीं करते हैं।
(Astha Jyotish asansol)
*Vastu Guru-Mkpoddar *
Wp.9333112719 *
नंबर 1 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 1 लोग सब कुछ में नेतृत्व करना पसंद करते हैं। अंक विज्ञान के विज्ञान के अनुसार, वे अपने साथी पर भी शासन करने की कोशिश करते हैं। आम तौर पर, उन्हें कुछ ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है जिसे वे तैयार नहीं हैं। इसके अलावा, वे समझौता नहीं करते हैं; वे महसूस करते हैं कि उनके पास कुछ असाधारण गुण हैं जिनके कारण वे असाधारण लोगों के साथ प्यार करते हैं। वे भावनात्मक से अधिक व्यावहारिक होते हैं और वे सुंदरता से प्यार करते हैं। प्रेम-निर्माण में, वे अपने साथी पर हावी होते हैं। वे रचनात्मक हैं और वे नई चीजों के साथ प्रयोग करने की कोशिश करते हैं। नंबर 1 के लोग अपने साथी को रिश्ते में वफादार होने की उम्मीद कर सकते हैं।
नंबर 2 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 2 लोग संवेदनशील, कामुक और मूडी होते हैं। उनके लिए, यह हमेशा अपने साथी के साथ मानसिक संबंध के बारे में है। उनके लिए, भावनात्मक कनेक्शन से शारीरिक संबंध कम महत्वपूर्ण है। उनके पास अत्यधिक मूड स्विंग है इसलिए उनके साथी के लिए एक स्थिर मन का होना महत्वपूर्ण है। संख्या 2 लोग केवल अपने साथी के साथ बहुत अच्छी समझ रखते हैं, तो प्यार और विवाह में संतुष्ट हो जाते हैं, सेक्स उनके लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं है। जब प्यार, रोमांस और शादी की बात आती है तो वे अपने दिल का पालन करते हैं।
नंबर 3 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 3 लोग नंबर 1 लोगों के समान होते हैं जब यह प्यार और विवाह के बारे में होता है। वे व्यावहारिक हैं और आमतौर पर अपने साथी पर निर्णय लेने के दौरान अपने दिल का पालन नहीं करेंगे। संख्या 3 लोग निडर और महत्वाकांक्षी हैं। वे अपने स्वयं के कानून बनाते हैं और बहुत आत्म-भ्रमित होते हैं। वे आम तौर पर सबसे अच्छा शादी करना चाहते हैं। वे 2, 6, 7 और 8 जैसी अन्य संख्याओं की तुलना में रोमांटिक नहीं हैं। इसके अलावा, ये लोग अपने साथी के साथ समय बिताने में विश्वास नहीं करते हैं; उनके लिए, उनके करियर का मुख्य महत्व है। यौन जीवन में भी, वे अपने साथी पर हावी होना पसंद करते हैं। वे सभी क्षेत्रों में अपनी श्रेष्ठता साबित करने का प्रयास करते हैं। रिश्ते उनके लिए अच्छा हो सकते हैं यदि दूसरा व्यक्ति इस बात से सहमत होने के लिए तैयार है कि वह दूसरा सर्वश्रेष्ठ है।
नंबर 4 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 4 लोग अपरंपरागत हैं और उनमें से प्रत्येक के बारे में कुछ अद्वितीय है। हालांकि, ज्योतिष के अनुसार, वे सामान्य रूप से रोमांटिक नहीं हैं। वे विवाह के बाहर अधिक रिश्ते रखते हैं, लेकिन केवल यौन आनंद के लिए। संख्या 4 लोग अपने रिश्तों में बहुत समर्पित हैं। भले ही उनके विवाह के बाहर यौन संबंध हों, फिर भी उनके साथी यह पता लगाने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि वे अपने साथी को समर्पित रहते हैं। 22 वें जन्म के लोग आमतौर पर अपने साथी के साथ वफादार होते हैं।
नंबर 5 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
विवाह से पहले 5 लोगों के पास बहुत से रिश्ते हो सकते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि उनके साथी सही हों। थोड़ी देर के बाद, वे अपने साथी के साथ ऊब जाते हैं क्योंकि उन्हें परिवर्तन और मनोरंजन पसंद है। संख्या 5 लोग बहुमुखी हैं और वे प्रयोग करना पसंद करते हैं। वे प्रेम बनाने के नए तरीकों का भी प्रयास करना पसंद करते हैं। रिश्ते में उनके लिए सेक्स महत्वपूर्ण है। उनका दिमाग बहुत तेज़ काम करता है, जिसके कारण वे अपने दिमाग को भी अक्सर बदलते हैं। वे आवेगपूर्ण हैं और संख्या 2 लोगों की तरह एक स्थिर जीवन साथी की जरूरत है। संख्या 8 संख्या 5 के लिए एक अच्छा मैच है। संख्या 5 लोग आम तौर पर प्यार में नहीं जाते हैं और रिश्ते और विवाह की बात करते समय वे व्यावहारिक निर्णय लेते हैं।
नंबर 6 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 6 शुक्र की संख्या है, जिसे प्यार और शांति के ग्रह के रूप में जाना जाता है। जब प्यार और रोमांस की बात आती है तो संख्या 6 लोग आकर्षक और चुंबकीय होते हैं। वे बहुत भावुक होते हैं। इन लोगों के लिए, अपने विवाह में मानसिक और भावनात्मक रूप से जुड़ा होना महत्वपूर्ण है। आम तौर पर, संख्या 6 लोग अपने आकर्षक व्यक्तित्व के कारण विपरीत लिंग के लोगों से घिरे हुए हैं। लोगों को आकर्षित करने की उनकी क्षमता अक्सर अपने साथी को ईर्ष्यालु बना देती है।
नंबर 7 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 7 लोग आम तौर पर कम बात करते हैं, क्योंकि वे सपने देखते हैं और विचारशील होते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे ठंडे हैं और रोमांटिक नहीं हैं। संख्या 7 केतु का प्रतिनिधित्व करता है,
जिसमें संख्या 2 के समान कुछ गुण हैं और यही कारण है कि वे संख्या 2 लोगों के साथ सबसे अच्छे हैं। उन्हें तनाव से बचने और अधिक आराम से रहना चाहिए। संख्या 2 की तरह, विवाह में अपने साथी के साथ संख्या 7 लोगों के लिए भावनात्मक रूप से जुड़ा होना महत्वपूर्ण है। आम तौर पर, संख्या 7 में से अधिकांश लोग वफादार होते हैं जब तक कि वे अपने साथी द्वारा बुरी तरह चोट नहीं खाते। नंबर 2 की तरह, उन्हें एक अच्छा करियर रखने के लिए अपने निजी जीवन में भी खुश होना चाहिए। संख्या 7 लोगों को गलतफहमी को दूर करने के लिए अक्सर अपने भागीदारों के साथ संवाद करना चाहिए।
नंबर 8 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 8 लोग सभी संख्याओं में सबसे वफादार हैं; हालांकि, वे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं क्योंकि उन्हें हर किसी द्वारा बड़े पैमाने पर गलत समझा जाता है। अधिकांश संख्या 8 महिलाएं अपने विवाह के जीवन में पीड़ित हैं। शादी करने से पहले कुंडली से सख्ती से मिलान करने के लिए संख्या 8 महिलाओं को सुझाव दिया जाता है। अपने साथी के प्रति वे वफादार रहते हैं। प्यार और रिश्तों की बात आती है जब वे व्यावहारिक नहीं होते हैं, वे सिर्फ अपने दिल का पालन करते हैं। वे किसी से जुड़ने के लिए बहुत समय लेते हैं, लेकिन एक बार वे जुड़ने के बाद अपने साथी का सम्मान करते हैं। संख्या 8 लोग अक्सर अन्य संख्या 8 और 4 के लिए आकर्षित होते हैं। लेकिन चूंकि ये दोनों संख्याएं संघर्ष लाती हैं, इसलिए दो नंबर 4 या 8 को कभी भी आपस में शादी नहीं करनी चाहिए। संख्या 2 के लोग एक बार जब रिश्ते से बाहर निकलने का फैसला करते हैं, तो कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता है।
नंबर 9 के लिए प्यार और विवाह भविष्यवाणियां:
संख्या 9 मंगल का प्रतीक है, जो एक विनाशकारी ग्रह है। इसी प्रकार, संख्या 9 लोग आक्रामकता और ऊर्जा से भरे हुए होते हैं। संख्या 9 लोग भावनात्मक होते हैं, लेकिन दुनिया शायद ही उस पक्ष को देख सकती है। संख्या 9 सेक्स को हमेशा अधिक महत्व देते हैं। संख्या 9 पुरुषों के विवाह के बाहर शारीरिक संबंध होते हैं, जो केवल शारीरिक सुख के लिए हैं और वे भावनात्मक नहीं होते हैं। संख्या 9 लोग अपने साथी के बारे में भावनात्मक होते हैं और अपने परिवारों से जुड़े हुए होते हैं। हालांकि, अगर उन्हें अपने विवाह के बाहर सेक्स का मौका मिलता है, तो वे संकोच नहीं करते हैं।
Tuesday, 31 December 2019
जन्म पत्रिका के बगैर date of birth जाने हस्तरेखा से
जन्म पत्रिका के बिना Date of birth हस्तरेखा से जाने:-
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार किसी भी जातक की हथेली में सामान्यत: मुख्य रूप से तीन रेखाएं दिखाई देती हैं। ये तीन रेखाएं जीवन रेखा(Life Line), मस्तिष्क रेखा(Mind Line) और हृदय रेखा होती हैं । इन्ही मदद से जन्म समय एवम वार - तिथि ज्ञात किए जा सकते हैं।
किसी भी जातक का हाथ या हथेली एक ऐसी जन्मपत्री (Janm kundli)है, जिसे स्वयं ब्रह्मा ने निर्मित किया है, जो कभी नष्ट नहीं होती है। इस जन्मपत्री में त्रुटि भी नहीं पाई जाती है। स्वयं ब्रह्मा ने इस जन्मपत्री में रेखाएं बनाई हैं एवं ग्रह स्पष्ट किए हैं। यह आजीवन सुरक्षित एवं साथ रहती है।
कहा जाता है कि पूर्व काल में शंकर जी के आशीर्वाद से उनके ज्येष्ठ पुत्र स्वामी कार्तिकेय ने, जनमानस की भलाई के लिए, हस्तरेखा शास्त्र की रचना की। जब यह शास्त्र पूरा होने आया, तो गणेश जी ने, आवेश में आकर, यह पुस्तक समुद्र में फेंक दी। शंकर जी ने समुद्र से आग्रह किया कि वह हस्तलिपि वापस करे। समुद्र ने उन प्रतिलिपियों को शंकर जी को वापस दिया और शंकर जी ने तबसे उसको सामुद्रिक शास्त्र के नाम से प्रचलित किया।
जानिए केसे करें अपनी वर्तमान की आयु का निर्धारण करें??
हथेली मे चार उंगली और एक अगूंठा होता है,अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत,फ़िर पहली उंगली तर्जनी उंगली की तरफ़ जाने पर अंगूठे और तर्जनी के बीच की जगह को मंगल पर्वत,तर्जनी के नीचे को गुरु पर्वत और बीच वाली उंगली के नीचे जिसे मध्यमा कहते है,शनि पर्वत,और बीच वाली उंगले के बाद वाली रिंग फ़िंगर या अनामिका के नीचे सूर्य पर्वत,अनामिका के बाद सबसे छोटी उंगली को कनिष्ठा कहते हैं,इसके नीचे बुध पर्वत का स्थान दिया गया है।
इन्ही पांच पर्वतों का आयु निर्धारण के लिये मुख्य स्थान माना जाता है,उंगलियों की जड से जो रेखायें ऊपर की ओर जाती है,जो रेखायें खडी होती है,उनके द्वारा ही आयु निर्धारण किया जाता है,गुरु पर्वत से तर्जनी उंगली की जड से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें जो कटी नही हों,बीचवाली उंगली के नीचे से जो शनि पर्वत कहलाता है,से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें,की गिनती करनी है।
ध्यान रहे कि कोई रेखा कटी नही होनी चाहिये,शनि पर्वत के नीचे वाली रेखाओं को ढाई से और बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलने वाली रेखाओं को डेढ से,गुणा करें,फ़िर मंगल पर्वत के नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली रेखाओं को जोड लें,इनका योगफ़ल ही वर्तमान उम्र होगी।
अपने जन्म का महिना और राशि को पता करने का नियम ---
अपने दोनो हाथों की तर्जनी उंगलियों के तीसरे पोर और दूसरे पोर में लम्बवत रेखाओं को २३ से गुणा करने पर जो संख्या आये,उसमें १२ का भाग देने पर जो संख्या शेष बचती है,वही जातक का जन्म का महिना और उसकी राशि होती है,महिना और राशि का पता करने के लिये इस प्रकार का वैदिक नियम अपनाया जा सकता है:-
१-बैशाख-मेष राशि
२.ज्येष्ठ-वृष राशि
३.आषाढ-मिथुन राशि
४.श्रावण-कर्क राशि
५.भाद्रपद-सिंह राशि
६.अश्विन-कन्या राशि
७.कार्तिक-तुला राशि
८.अगहन-वृश्चिक राशि
९.पौष-धनु राशि
१०.माघ-मकर राशि
११.फ़ाल्गुन-कुम्भ राशि
१२.चैत्र-मीन राशि
इस प्रकार से अगर भाग देने के बाद शेष १ बचता है तो बैसाख मास और मेष राशि मानी जाती है,और २ शेष बचने पर ज्येष्ठ मास और वृष राशि मानी जाती है।
हाथ में राशि का स्पष्ट निशान भी पाया जाता है
प्रकृति ने अपने द्वारा संसार के सभी प्राणियों की पहिचान के लिये अलग अलग नियम प्रतिपादित किये है,जिस प्रकार से जानवरों में अपनी अपनी प्रकृति के अनुसार उम्र की पहिचान की जाती है,उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में दाहिने या बायें हाथ की अनामिका उंगली के नीचे के पोर में सूर्य पर्वत पर राशि का स्पष्ट निशान पाया जाता है। उस राशि के चिन्ह के अनुसार महिने का उपरोक्त तरीके से पता किया जा सकता है।
पक्ष और दिन का तथा रात के बारे में ज्ञान करना ---
वैदिक रीति के अनुसार एक माह के दो पक्ष होते है,किसी भी हिन्दू माह के शुरुआत में कृष्ण पक्ष शुरु होता है,और बीच से शुक्ल पक्ष शुरु होता है,व्यक्ति के जन्म के पक्ष को जानने के लिये दोनों हाथों के अंगूठों के बीच के अंगूठे के विभाजित करने वाली रेखा को देखिये,दाहिने हाथ के अंगूठे के बीच की रेखा को देखने पर अगर वह दो रेखायें एक जौ का निशान बनाती है,तो जन्म शुक्ल पक्ष का जानना चाहिये,और जन्म दिन का माना जाता है,इसी प्रकार अगर दाहिने हाथ में केवल एक ही रेखा हो,और बायें हाथ में अगर जौ का निशान हो तो जन्म शुक्ल पक्ष का और रात का जन्म होता है,अगर दाहिने और बायें दोनो हाथों के अंगूठों में ही जौ का निशान हो तो जन्म कृष्ण पक्ष रात का मानना चाहिये,साधारणत: दाहिने हाथ में जौ का निशान शुक्ल पक्ष और बायें हाथ में जौ का निशान कृष्ण पक्ष का जन्म बताता है।
ऐसे करें जन्म तारीख की गणना --मध्यमा उंगली के दूसरे पोर में तथा तीसरे पोर में जितनी भी लम्बी रेखायें हों,उन सबको मिलाकर जोड लें,और उस जोड में ३२ और मिला लें,फ़िर ५ का गुणा कर लें,और गुणनफ़ल में १५ का भाग देने जो संख्या शेष बचे वही जन्म तारीख होती है। दूसरा नियम है कि अंगूठे के नीचे शुक्र क्षेत्र कहा जाता है,इस क्षेत्र में खडी रेखाओं को गुना जाता है,जो रेखायें आडी रेखाओं के द्वारा काटी गयीं हो,उनको नही गिनना चाहिये,इन्हे ६ से गुणा करने पर और १५ से भाग देने पर शेष मिली संख्या ही तिथि का ज्ञान करवाती है,यदि शून्य बचता है तो वह पूर्णमासी का भान करवाती है,१५ की संख्या के बाद की संख्या को कृष्ण पक्ष की तिथि मानी जाती है।
जन्म वार का पता करना ---
अनामिका के दूसरे तथा तीसरे पोर में जितनी लम्बी रेखायें हों,उनको ५१७ से जोडकर ५ से गुणा करने के बाद ७ का भाग दिया जाता है,और जो संख्या शेष बचती है वही वार की संख्या होती है। १ से रविवार २ से सोमवार तीन से मंगलवार और ४ से बुधवार इसी प्रकार शनिवार तक गिनते जाते है।
जन्म समय और लगन की गणना ---
सूर्य पर्वत पर तथा अनामिका के पहले पोर पर,गुरु पर्वत पर तथा मध्यमा के प्रथम पोर पर जितनी खडी रेखायें होती है,उन्हे गिनकर उस संख्या में ८११ जोडकर १२४ से गुणा करने के बाद ६० से भाग दिया जाता है,भागफ़ल जन्म समय घंटे और मिनट का होता है,योगफ़ल अगर २४ से अधिक का है,तो २४ से फ़िर भाग दिया जाता है।
जीवन : जीवन रेखा पर वर्ग का चिह्न हो तो यह व्यक्ति के जीवन की रक्षा करता है। आयु के संबंध में जीवन रेखा के साथ ही स्वास्थ्य रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा और अन्य छोटी-छोटी रेखाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
अल्पायु : यदि दोनों हाथों में जीवन रेखा बहुत छोटी हो तो वह व्यक्ति अल्पायु हो सकता है। जीवन रेखा जहां-जहां श्रृंखलाकार होगी, उस आयु में व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रसित हो सकता है।
लंबी आयु : हस्तरेखा ज्योतिष में बताया गया है कि लंबी, गहरी, पतली और साफ जीवन रेखा शुभ होती है। जीवन रेखा पर क्रॉस का चिह्न अशुभ होता है। यदि जीवन रेखा शुभ है तो व्यक्ति की आयु लंबी होती है और उसका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
जातक का स्वभाव : यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा चंद्र पर्वत तक चली जाए तो व्यक्ति का जीवन अस्थिर हो सकता है। अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं और शुक्र के दूसरी ओर चंद्र पर्वत स्थित होता है। यदि इस प्रकार की जीवन रेखा कोमल हाथों में हो और मस्तिष्क रेखा भी ढलान लिए हुए हो, तो व्यक्ति का स्वभाव स्थिर होता है। इस प्रकार के लोग साहस भरे और उत्तेजना से पूर्ण कार्य करना चाहते हैं।
जातक का व्यक्तित्व : यदि जीवन रेखा पीलापन लिए और चौड़ी हो तो ऐसा व्यक्ति बुरी प्रवृत्ति, खराब चरित्र वाला और बीमार स्वास्थ्य का मालिक होता है।
(Astha Jyotish asansol)
वाास्तु गुरु Mkpoddar. Wp.9333112719.
सोच-विचार : यदि मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा के मध्य अधिक अंतर हो तो व्यक्ति बिना सोच-विचार के कार्य करने वाला होता है।
स्वतंत्र विचार : यदि मस्तिष्क रेखा (मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा लगभग एक ही स्थान से प्रारंभ होती है) और जीवन रेखा के मध्य थोड़ा अंतर हो तो व्यक्ति स्वतंत्र विचारों वाला होता है।
निर्बलता : यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा श्रृंखलाकार या अलग-अलग टुकड़ों से जुड़ी हुई या बनी हुई हो तो व्यक्ति निर्बल हो सकता है। ऐसे लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से भी परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसा विशेषत: तब होता है, जब हाथ बहुत कोमल हो। जब जीवन रेखा के दोष दूर हो जाते हैं तो व्यक्ति का जीवन सामान्य हो जाता है।
तरक्की : यदि जीवन रेखा से कोई शाखा गुरु पर्वत क्षेत्र (इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग को गुरु पर्वत कहते हैं।) की ओर उठती दिखाई दे या गुरु पर्वत में जा मिले तो इसका अर्थ यह समझना चाहिए कि व्यक्ति को कोई बड़ा पद या व्यापार-व्यवसाय में तरक्की प्राप्त होती है।
धन-संपत्ति : यदि जीवन रेखा से कोई शाखा शनि पर्वत क्षेत्र (मिडिल फिंगर के नीचे वाले भाग को शनि पर्वत कहते हैं।) की ओर उठकर भाग्य रेखा के साथ-साथ चलती दिखाई दे तो इसका अर्थ यह होता है कि व्यक्ति को धन-संपत्ति का लाभ मिल सकता है। ऐसी रेखा के प्रभाव से व्यक्ति को सुख-सुविधाओं की वस्तुएं भी प्राप्त हो सकती हैं।
भाग्य : यदि जीवन रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा तीनों प्रारंभ में मिली हुई हो तो व्यक्ति भाग्यहीन, दुर्बल और परेशानियों से घिरा होता है। (हृदय रेखा इंडेक्स फिंगर और मिडिल फिंगर के आसपास से प्रारंभ होकर सबसे छोटी उंगली की ओर जाती है।)
परेशानियां : यदि जीवन रेखा को कई छोटी-छोटी रेखाएं काटती हुई नीचे की ओर जाती हो तो ये रेखाएं व्यक्ति के जीवन में परेशानियों को दर्शाती हैं। यदि इस तरह की रेखाएं ऊपर की ओर जा रही हों तो व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है।
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार किसी भी जातक की हथेली में सामान्यत: मुख्य रूप से तीन रेखाएं दिखाई देती हैं। ये तीन रेखाएं जीवन रेखा(Life Line), मस्तिष्क रेखा(Mind Line) और हृदय रेखा होती हैं । इन्ही मदद से जन्म समय एवम वार - तिथि ज्ञात किए जा सकते हैं।
किसी भी जातक का हाथ या हथेली एक ऐसी जन्मपत्री (Janm kundli)है, जिसे स्वयं ब्रह्मा ने निर्मित किया है, जो कभी नष्ट नहीं होती है। इस जन्मपत्री में त्रुटि भी नहीं पाई जाती है। स्वयं ब्रह्मा ने इस जन्मपत्री में रेखाएं बनाई हैं एवं ग्रह स्पष्ट किए हैं। यह आजीवन सुरक्षित एवं साथ रहती है।
कहा जाता है कि पूर्व काल में शंकर जी के आशीर्वाद से उनके ज्येष्ठ पुत्र स्वामी कार्तिकेय ने, जनमानस की भलाई के लिए, हस्तरेखा शास्त्र की रचना की। जब यह शास्त्र पूरा होने आया, तो गणेश जी ने, आवेश में आकर, यह पुस्तक समुद्र में फेंक दी। शंकर जी ने समुद्र से आग्रह किया कि वह हस्तलिपि वापस करे। समुद्र ने उन प्रतिलिपियों को शंकर जी को वापस दिया और शंकर जी ने तबसे उसको सामुद्रिक शास्त्र के नाम से प्रचलित किया।
जानिए केसे करें अपनी वर्तमान की आयु का निर्धारण करें??
हथेली मे चार उंगली और एक अगूंठा होता है,अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत,फ़िर पहली उंगली तर्जनी उंगली की तरफ़ जाने पर अंगूठे और तर्जनी के बीच की जगह को मंगल पर्वत,तर्जनी के नीचे को गुरु पर्वत और बीच वाली उंगली के नीचे जिसे मध्यमा कहते है,शनि पर्वत,और बीच वाली उंगले के बाद वाली रिंग फ़िंगर या अनामिका के नीचे सूर्य पर्वत,अनामिका के बाद सबसे छोटी उंगली को कनिष्ठा कहते हैं,इसके नीचे बुध पर्वत का स्थान दिया गया है।
इन्ही पांच पर्वतों का आयु निर्धारण के लिये मुख्य स्थान माना जाता है,उंगलियों की जड से जो रेखायें ऊपर की ओर जाती है,जो रेखायें खडी होती है,उनके द्वारा ही आयु निर्धारण किया जाता है,गुरु पर्वत से तर्जनी उंगली की जड से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें जो कटी नही हों,बीचवाली उंगली के नीचे से जो शनि पर्वत कहलाता है,से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें,की गिनती करनी है।
ध्यान रहे कि कोई रेखा कटी नही होनी चाहिये,शनि पर्वत के नीचे वाली रेखाओं को ढाई से और बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलने वाली रेखाओं को डेढ से,गुणा करें,फ़िर मंगल पर्वत के नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली रेखाओं को जोड लें,इनका योगफ़ल ही वर्तमान उम्र होगी।
अपने जन्म का महिना और राशि को पता करने का नियम ---
अपने दोनो हाथों की तर्जनी उंगलियों के तीसरे पोर और दूसरे पोर में लम्बवत रेखाओं को २३ से गुणा करने पर जो संख्या आये,उसमें १२ का भाग देने पर जो संख्या शेष बचती है,वही जातक का जन्म का महिना और उसकी राशि होती है,महिना और राशि का पता करने के लिये इस प्रकार का वैदिक नियम अपनाया जा सकता है:-
१-बैशाख-मेष राशि
२.ज्येष्ठ-वृष राशि
३.आषाढ-मिथुन राशि
४.श्रावण-कर्क राशि
५.भाद्रपद-सिंह राशि
६.अश्विन-कन्या राशि
७.कार्तिक-तुला राशि
८.अगहन-वृश्चिक राशि
९.पौष-धनु राशि
१०.माघ-मकर राशि
११.फ़ाल्गुन-कुम्भ राशि
१२.चैत्र-मीन राशि
इस प्रकार से अगर भाग देने के बाद शेष १ बचता है तो बैसाख मास और मेष राशि मानी जाती है,और २ शेष बचने पर ज्येष्ठ मास और वृष राशि मानी जाती है।
हाथ में राशि का स्पष्ट निशान भी पाया जाता है
प्रकृति ने अपने द्वारा संसार के सभी प्राणियों की पहिचान के लिये अलग अलग नियम प्रतिपादित किये है,जिस प्रकार से जानवरों में अपनी अपनी प्रकृति के अनुसार उम्र की पहिचान की जाती है,उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में दाहिने या बायें हाथ की अनामिका उंगली के नीचे के पोर में सूर्य पर्वत पर राशि का स्पष्ट निशान पाया जाता है। उस राशि के चिन्ह के अनुसार महिने का उपरोक्त तरीके से पता किया जा सकता है।
पक्ष और दिन का तथा रात के बारे में ज्ञान करना ---
वैदिक रीति के अनुसार एक माह के दो पक्ष होते है,किसी भी हिन्दू माह के शुरुआत में कृष्ण पक्ष शुरु होता है,और बीच से शुक्ल पक्ष शुरु होता है,व्यक्ति के जन्म के पक्ष को जानने के लिये दोनों हाथों के अंगूठों के बीच के अंगूठे के विभाजित करने वाली रेखा को देखिये,दाहिने हाथ के अंगूठे के बीच की रेखा को देखने पर अगर वह दो रेखायें एक जौ का निशान बनाती है,तो जन्म शुक्ल पक्ष का जानना चाहिये,और जन्म दिन का माना जाता है,इसी प्रकार अगर दाहिने हाथ में केवल एक ही रेखा हो,और बायें हाथ में अगर जौ का निशान हो तो जन्म शुक्ल पक्ष का और रात का जन्म होता है,अगर दाहिने और बायें दोनो हाथों के अंगूठों में ही जौ का निशान हो तो जन्म कृष्ण पक्ष रात का मानना चाहिये,साधारणत: दाहिने हाथ में जौ का निशान शुक्ल पक्ष और बायें हाथ में जौ का निशान कृष्ण पक्ष का जन्म बताता है।
ऐसे करें जन्म तारीख की गणना --मध्यमा उंगली के दूसरे पोर में तथा तीसरे पोर में जितनी भी लम्बी रेखायें हों,उन सबको मिलाकर जोड लें,और उस जोड में ३२ और मिला लें,फ़िर ५ का गुणा कर लें,और गुणनफ़ल में १५ का भाग देने जो संख्या शेष बचे वही जन्म तारीख होती है। दूसरा नियम है कि अंगूठे के नीचे शुक्र क्षेत्र कहा जाता है,इस क्षेत्र में खडी रेखाओं को गुना जाता है,जो रेखायें आडी रेखाओं के द्वारा काटी गयीं हो,उनको नही गिनना चाहिये,इन्हे ६ से गुणा करने पर और १५ से भाग देने पर शेष मिली संख्या ही तिथि का ज्ञान करवाती है,यदि शून्य बचता है तो वह पूर्णमासी का भान करवाती है,१५ की संख्या के बाद की संख्या को कृष्ण पक्ष की तिथि मानी जाती है।
जन्म वार का पता करना ---
अनामिका के दूसरे तथा तीसरे पोर में जितनी लम्बी रेखायें हों,उनको ५१७ से जोडकर ५ से गुणा करने के बाद ७ का भाग दिया जाता है,और जो संख्या शेष बचती है वही वार की संख्या होती है। १ से रविवार २ से सोमवार तीन से मंगलवार और ४ से बुधवार इसी प्रकार शनिवार तक गिनते जाते है।
जन्म समय और लगन की गणना ---
सूर्य पर्वत पर तथा अनामिका के पहले पोर पर,गुरु पर्वत पर तथा मध्यमा के प्रथम पोर पर जितनी खडी रेखायें होती है,उन्हे गिनकर उस संख्या में ८११ जोडकर १२४ से गुणा करने के बाद ६० से भाग दिया जाता है,भागफ़ल जन्म समय घंटे और मिनट का होता है,योगफ़ल अगर २४ से अधिक का है,तो २४ से फ़िर भाग दिया जाता है।
जीवन : जीवन रेखा पर वर्ग का चिह्न हो तो यह व्यक्ति के जीवन की रक्षा करता है। आयु के संबंध में जीवन रेखा के साथ ही स्वास्थ्य रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा और अन्य छोटी-छोटी रेखाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
अल्पायु : यदि दोनों हाथों में जीवन रेखा बहुत छोटी हो तो वह व्यक्ति अल्पायु हो सकता है। जीवन रेखा जहां-जहां श्रृंखलाकार होगी, उस आयु में व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रसित हो सकता है।
लंबी आयु : हस्तरेखा ज्योतिष में बताया गया है कि लंबी, गहरी, पतली और साफ जीवन रेखा शुभ होती है। जीवन रेखा पर क्रॉस का चिह्न अशुभ होता है। यदि जीवन रेखा शुभ है तो व्यक्ति की आयु लंबी होती है और उसका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
जातक का स्वभाव : यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा चंद्र पर्वत तक चली जाए तो व्यक्ति का जीवन अस्थिर हो सकता है। अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं और शुक्र के दूसरी ओर चंद्र पर्वत स्थित होता है। यदि इस प्रकार की जीवन रेखा कोमल हाथों में हो और मस्तिष्क रेखा भी ढलान लिए हुए हो, तो व्यक्ति का स्वभाव स्थिर होता है। इस प्रकार के लोग साहस भरे और उत्तेजना से पूर्ण कार्य करना चाहते हैं।
जातक का व्यक्तित्व : यदि जीवन रेखा पीलापन लिए और चौड़ी हो तो ऐसा व्यक्ति बुरी प्रवृत्ति, खराब चरित्र वाला और बीमार स्वास्थ्य का मालिक होता है।
(Astha Jyotish asansol)
वाास्तु गुरु Mkpoddar. Wp.9333112719.
सोच-विचार : यदि मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा के मध्य अधिक अंतर हो तो व्यक्ति बिना सोच-विचार के कार्य करने वाला होता है।
स्वतंत्र विचार : यदि मस्तिष्क रेखा (मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा लगभग एक ही स्थान से प्रारंभ होती है) और जीवन रेखा के मध्य थोड़ा अंतर हो तो व्यक्ति स्वतंत्र विचारों वाला होता है।
निर्बलता : यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा श्रृंखलाकार या अलग-अलग टुकड़ों से जुड़ी हुई या बनी हुई हो तो व्यक्ति निर्बल हो सकता है। ऐसे लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से भी परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसा विशेषत: तब होता है, जब हाथ बहुत कोमल हो। जब जीवन रेखा के दोष दूर हो जाते हैं तो व्यक्ति का जीवन सामान्य हो जाता है।
तरक्की : यदि जीवन रेखा से कोई शाखा गुरु पर्वत क्षेत्र (इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग को गुरु पर्वत कहते हैं।) की ओर उठती दिखाई दे या गुरु पर्वत में जा मिले तो इसका अर्थ यह समझना चाहिए कि व्यक्ति को कोई बड़ा पद या व्यापार-व्यवसाय में तरक्की प्राप्त होती है।
धन-संपत्ति : यदि जीवन रेखा से कोई शाखा शनि पर्वत क्षेत्र (मिडिल फिंगर के नीचे वाले भाग को शनि पर्वत कहते हैं।) की ओर उठकर भाग्य रेखा के साथ-साथ चलती दिखाई दे तो इसका अर्थ यह होता है कि व्यक्ति को धन-संपत्ति का लाभ मिल सकता है। ऐसी रेखा के प्रभाव से व्यक्ति को सुख-सुविधाओं की वस्तुएं भी प्राप्त हो सकती हैं।
भाग्य : यदि जीवन रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा तीनों प्रारंभ में मिली हुई हो तो व्यक्ति भाग्यहीन, दुर्बल और परेशानियों से घिरा होता है। (हृदय रेखा इंडेक्स फिंगर और मिडिल फिंगर के आसपास से प्रारंभ होकर सबसे छोटी उंगली की ओर जाती है।)
परेशानियां : यदि जीवन रेखा को कई छोटी-छोटी रेखाएं काटती हुई नीचे की ओर जाती हो तो ये रेखाएं व्यक्ति के जीवन में परेशानियों को दर्शाती हैं। यदि इस तरह की रेखाएं ऊपर की ओर जा रही हों तो व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है।
महत्वाकांक्षा : यदि जीवन रेखा गुरु पर्वत से प्रारंभ हुई हो तो व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होता है। ये लोग अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें wp 9333112719
अशुभ लक्षण : जब टूटी हुई जीवन रेखा शुक्र पर्वत के भीतर की ओर मुड़ती दिखाई देती है तो यह अशुभ लक्षण होता है। ऐसी जीवन रेखा बताती है कि व्यक्ति को किसी बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।
कष्ट, गंभीर बीमारी : यदि जीवन रेखा बाएं हाथ में टूटी हुई हो और दाहिने हाथ में साफ तथा सुस्पष्ट है तब यह कुछ गंभीर बीमारी का संकेत है। परन्तु अंतत: बीमारी ठीक हो जाती है लेकिन यदि जीवन रेखा दोनो हाथ मे टूटी हुई हो तो व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है।
मृत्यु : यदि जीवन रेखा अंत में दो भागों में विभाजित हो गई हो तो व्यक्ति की मृत्यु जन्म स्थान से दूर होती है।
Monday, 30 December 2019
पुत्र प्राप्ति के लिए
(पुत्र प्राप्ति के लिए)
दंपति की इच्छा होती है कि उनके घर में आने वाला नया सदस्य पुत्र ही हो। कुछ लोग पुत्र-पुत्री में भेद नहीं करते, ऐसे लोगों का प्रतिशत बहुत कम है। यदि आप पुत्र चाहते हैं या पुत्री चाहते हैं तो कुछ तरीके यहां दिए जा रहे हैं, जिन पर अमल कर उसी तरीके से सम्भोग करें तो आप कुछ हद तक अपनी मनचाही संतान प्राप्त कर सकते हैं-
* पुत्र प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चौथे दिन सहवास की रात्रि आने पर एक प्याला भरकर चावल का धोवन यानी मांड में एक नीबू का रस निचोड़कर पी जावें। अगर इच्छुक महिला रजोधर्म से मुक्ति पाकर लगातार तीन दिन चावल का धोवन यानी मांड में एक नीबू निचोड़कर पीने के बाद उत्साह से पति के साथ सहवास करे तो उसकी पुत्र की कामना के लिए भगवान को भी वरदान देना पड़ेगा। गर्भ न ठहरने तक प्रतिमाह यह प्रयोग तीन दिन तक करें, गर्भ ठहरने के बाद नहीं करें।
* गर्भाधान के संबंध में आयुर्वेद में लिखा है कि गर्भाधान ऋतुकाल (मासिक धर्म) की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक ऋतु स्राव शुरू हो, उस दिन तथा रात को प्रथम दिन या रात मानकर गिनती करना चाहिए। छठी, आठवीं आदि सम रात्रियां पुत्र उत्पत्ति के लिए और सातवीं, नौवीं आदि विषम रात्रियां पुत्री की उत्पत्ति के लिए होती हैं अतः जैसी संतान की इच्छा हो, उसी रात्रि को गर्भाधान करना चाहिए।
* इस संबंध में एक और बात का ध्यान रखें कि इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रात (पूर्णिमा) वाला पखवाड़ा भी हो, यह अनिवार्य है, यानी कृष्ण पक्ष की रातें हों तो गर्भाधान की इच्छा से सहवास न कर परिवार नियोजन के साधन अपनाना चाहिए।
* शुक्ल पक्ष में जैसे-जैसे तिथियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे चन्द्रमा की कलाएं बढ़ती हैं। इसी प्रकार ऋतुकाल की रात्रियों का क्रम जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पुत्र उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती है, यानी छठवीं रात की अपेक्षा आठवीं, आठवीं की अपेक्षा दसवीं, दसवीं की अपेक्षा बारहवीं रात अधिक उपयुक्त होती है।
* पूरे मास में इस विधि से किए गए सहवास के अलावा पुनः सहवास नहीं करना चाहिए, वरना घपला भी हो सकता है। ऋतु दर्शन के दिन से 16 रात्रियों में शुरू की चार रात्रियां, ग्यारहवीं व तेरहवीं और अमावस्या की रात्रि गर्भाधान के लिए वर्जित कही गई है। सिर्फ सम संख्या यानी छठी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं और चौदहवीं रात्रि को ही गर्भाधान संस्कार करना चाहिए।
* गर्भाधान वाले दिन व रात्रि में आहार-विहार एवं आचार-विचार शुभ पवित्र रखते हुए मन में हर्ष व उत्साह रखना चाहिए। गर्भाधान के दिन से ही चावल की खीर, दूध, भात, शतावरी का चूर्ण दूध के साथ रात को सोते समय, प्रातः मक्खन-मिश्री, जरा सी पिसी काली मिर्च मिलाकर ऊपर से कच्चा नारियल व सौंफ खाते रहना चाहिए, यह पूरे नौ माह तक करना चाहिए, इससे होने वाली संतान गौरवर्ण, स्वस्थ, सुडौल होती है।
* गोराचन 30 ग्राम, गंजपीपल 10 ग्राम, असगंध 10 ग्राम, तीनों को बारीक पीसें, चौथे दिन स्नान के बाद पांच दिनों तक प्रयोग में लाएं, गर्भधारण के साथ ही पुत्र अवश्य पैदा होगा।
शक्तिशाली व गोरे पुत्र प्राप्ति के लिए—
गर्भिणी स्त्री ढाक (पलाश) का एक कोमल पत्ता घोंटकर गौदुग्ध के साथ रोज़ सेवन करे | इससे बालक शक्तिशाली और गोरा होता है | माता-पीता भले काले हों, फिर भी बालक गोरा होगा | इसके साथ सुवर्णप्राश की २-२ गोलियां लेने से संतान तेजस्वी होगी |
यदि आपकी संनात होती हो परन्तु जीवित न रहती हो तो सन्तान होने पर मिठाई के स्थान पर नमकीन बांटें। भगवान शिव का अभिषेक करायें तथा सूर्योदय के समय तिल के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के पास जलायें, लाभ अवश्य होगा। मां दुर्गा के दरबार में सुहाग सामिग्री चढ़ाये तथा कुंजिका स्तात्र का पाठ करें तो भी अवश्य लाभ मिलेगा।
पुत्र प्राप्ति हेतु गर्भाधान का तरीका—–
पुराने आयुर्वेद ग्रंथों में पुत्र-पुत्री प्राप्ति हेतु दिन-रात, शुक्ल पक्ष-कृष्ण पक्ष तथा माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महत्व बताया गया है। धर्म ग्रंथों में भी इस बारे में जानकारी मिलती है।
यदि आप पुत्र प्राप्त करना चाहते हैं और वह भी गुणवान, तो हम आपकी सुविधा के लिए हम यहाँ माहवारी के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
(Vastu Guru Mkpoddar)
* चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
* पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
* छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
* सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
* आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
* नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
Astha Jyotish @ wp.9333112719.
* दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
* ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
* बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
* तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
* चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
* पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।
* सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।
व्यास मुनि ने इन्हीं सूत्रों के आधार पर पर अम्बिका, अम्बालिका तथा दासी के नियोग (समागम) किया, जिससे धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर का जन्म हुआ। महर्षि मनु तथा व्यास मुनि के उपरोक्त सूत्रों की पुष्टि स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक ‘संस्कार विधि’ में स्पष्ट रूप से कर दी है। प्राचीनकाल के महान चिकित्सक वाग्भट तथा भावमिश्र ने महर्षि मनु के उपरोक्त कथन की पुष्टि
पूर्णरूप से की है।
गर्भाधान मुहूर्त—–
जिस स्त्री को जिस दिन मासिक धर्म हो,उससे चार रात्रि पश्चात सम रात्रि में जबकि शुभ ग्रह केन्द्र (१,४,७,१०) तथा त्रिकोण (१,५,९) में हों,तथा पाप ग्रह (३,६,११) में हों ऐसी लग्न में पुरुष को पुत्र प्राप्ति के लिये अपनी स्त्री के साथ संगम करना चाहिये। मृगशिरा अनुराधा श्रवण रोहिणी हस्त तीनों उत्तरा स्वाति धनिष्ठा और शतभिषा इन नक्षत्रों में षष्ठी को छोड कर अन्य तिथियों में तथा दिनों में गर्भाधान करना चाहिये,भूल कर भी शनिवार मंगलवार गुरुवार को पुत्र प्राप्ति के लिये संगम नही करना चाहिये।
दंपति की इच्छा होती है कि उनके घर में आने वाला नया सदस्य पुत्र ही हो। कुछ लोग पुत्र-पुत्री में भेद नहीं करते, ऐसे लोगों का प्रतिशत बहुत कम है। यदि आप पुत्र चाहते हैं या पुत्री चाहते हैं तो कुछ तरीके यहां दिए जा रहे हैं, जिन पर अमल कर उसी तरीके से सम्भोग करें तो आप कुछ हद तक अपनी मनचाही संतान प्राप्त कर सकते हैं-
* पुत्र प्राप्ति हेतु मासिक धर्म के चौथे दिन सहवास की रात्रि आने पर एक प्याला भरकर चावल का धोवन यानी मांड में एक नीबू का रस निचोड़कर पी जावें। अगर इच्छुक महिला रजोधर्म से मुक्ति पाकर लगातार तीन दिन चावल का धोवन यानी मांड में एक नीबू निचोड़कर पीने के बाद उत्साह से पति के साथ सहवास करे तो उसकी पुत्र की कामना के लिए भगवान को भी वरदान देना पड़ेगा। गर्भ न ठहरने तक प्रतिमाह यह प्रयोग तीन दिन तक करें, गर्भ ठहरने के बाद नहीं करें।
* गर्भाधान के संबंध में आयुर्वेद में लिखा है कि गर्भाधान ऋतुकाल (मासिक धर्म) की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक ऋतु स्राव शुरू हो, उस दिन तथा रात को प्रथम दिन या रात मानकर गिनती करना चाहिए। छठी, आठवीं आदि सम रात्रियां पुत्र उत्पत्ति के लिए और सातवीं, नौवीं आदि विषम रात्रियां पुत्री की उत्पत्ति के लिए होती हैं अतः जैसी संतान की इच्छा हो, उसी रात्रि को गर्भाधान करना चाहिए।
* इस संबंध में एक और बात का ध्यान रखें कि इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रात (पूर्णिमा) वाला पखवाड़ा भी हो, यह अनिवार्य है, यानी कृष्ण पक्ष की रातें हों तो गर्भाधान की इच्छा से सहवास न कर परिवार नियोजन के साधन अपनाना चाहिए।
* शुक्ल पक्ष में जैसे-जैसे तिथियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे चन्द्रमा की कलाएं बढ़ती हैं। इसी प्रकार ऋतुकाल की रात्रियों का क्रम जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पुत्र उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती है, यानी छठवीं रात की अपेक्षा आठवीं, आठवीं की अपेक्षा दसवीं, दसवीं की अपेक्षा बारहवीं रात अधिक उपयुक्त होती है।
* पूरे मास में इस विधि से किए गए सहवास के अलावा पुनः सहवास नहीं करना चाहिए, वरना घपला भी हो सकता है। ऋतु दर्शन के दिन से 16 रात्रियों में शुरू की चार रात्रियां, ग्यारहवीं व तेरहवीं और अमावस्या की रात्रि गर्भाधान के लिए वर्जित कही गई है। सिर्फ सम संख्या यानी छठी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं और चौदहवीं रात्रि को ही गर्भाधान संस्कार करना चाहिए।
* गर्भाधान वाले दिन व रात्रि में आहार-विहार एवं आचार-विचार शुभ पवित्र रखते हुए मन में हर्ष व उत्साह रखना चाहिए। गर्भाधान के दिन से ही चावल की खीर, दूध, भात, शतावरी का चूर्ण दूध के साथ रात को सोते समय, प्रातः मक्खन-मिश्री, जरा सी पिसी काली मिर्च मिलाकर ऊपर से कच्चा नारियल व सौंफ खाते रहना चाहिए, यह पूरे नौ माह तक करना चाहिए, इससे होने वाली संतान गौरवर्ण, स्वस्थ, सुडौल होती है।
* गोराचन 30 ग्राम, गंजपीपल 10 ग्राम, असगंध 10 ग्राम, तीनों को बारीक पीसें, चौथे दिन स्नान के बाद पांच दिनों तक प्रयोग में लाएं, गर्भधारण के साथ ही पुत्र अवश्य पैदा होगा।
शक्तिशाली व गोरे पुत्र प्राप्ति के लिए—
गर्भिणी स्त्री ढाक (पलाश) का एक कोमल पत्ता घोंटकर गौदुग्ध के साथ रोज़ सेवन करे | इससे बालक शक्तिशाली और गोरा होता है | माता-पीता भले काले हों, फिर भी बालक गोरा होगा | इसके साथ सुवर्णप्राश की २-२ गोलियां लेने से संतान तेजस्वी होगी |
यदि आपकी संनात होती हो परन्तु जीवित न रहती हो तो सन्तान होने पर मिठाई के स्थान पर नमकीन बांटें। भगवान शिव का अभिषेक करायें तथा सूर्योदय के समय तिल के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के पास जलायें, लाभ अवश्य होगा। मां दुर्गा के दरबार में सुहाग सामिग्री चढ़ाये तथा कुंजिका स्तात्र का पाठ करें तो भी अवश्य लाभ मिलेगा।
पुत्र प्राप्ति हेतु गर्भाधान का तरीका—–
पुराने आयुर्वेद ग्रंथों में पुत्र-पुत्री प्राप्ति हेतु दिन-रात, शुक्ल पक्ष-कृष्ण पक्ष तथा माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महत्व बताया गया है। धर्म ग्रंथों में भी इस बारे में जानकारी मिलती है।
यदि आप पुत्र प्राप्त करना चाहते हैं और वह भी गुणवान, तो हम आपकी सुविधा के लिए हम यहाँ माहवारी के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
(Vastu Guru Mkpoddar)
* चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
* पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
* छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
* सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
* आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
* नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
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* दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
* ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
* बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
* तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
* चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
* पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।
* सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।
व्यास मुनि ने इन्हीं सूत्रों के आधार पर पर अम्बिका, अम्बालिका तथा दासी के नियोग (समागम) किया, जिससे धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर का जन्म हुआ। महर्षि मनु तथा व्यास मुनि के उपरोक्त सूत्रों की पुष्टि स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक ‘संस्कार विधि’ में स्पष्ट रूप से कर दी है। प्राचीनकाल के महान चिकित्सक वाग्भट तथा भावमिश्र ने महर्षि मनु के उपरोक्त कथन की पुष्टि
पूर्णरूप से की है।
गर्भाधान मुहूर्त—–
जिस स्त्री को जिस दिन मासिक धर्म हो,उससे चार रात्रि पश्चात सम रात्रि में जबकि शुभ ग्रह केन्द्र (१,४,७,१०) तथा त्रिकोण (१,५,९) में हों,तथा पाप ग्रह (३,६,११) में हों ऐसी लग्न में पुरुष को पुत्र प्राप्ति के लिये अपनी स्त्री के साथ संगम करना चाहिये। मृगशिरा अनुराधा श्रवण रोहिणी हस्त तीनों उत्तरा स्वाति धनिष्ठा और शतभिषा इन नक्षत्रों में षष्ठी को छोड कर अन्य तिथियों में तथा दिनों में गर्भाधान करना चाहिये,भूल कर भी शनिवार मंगलवार गुरुवार को पुत्र प्राप्ति के लिये संगम नही करना चाहिये।
Sunday, 22 December 2019
7 चक्र से कैसे जाने अपनी बीमारी के बारे में
*हमा
रे जीवन में किसी भी बीमारी का कारण हमारे सातो चक्रों
में से किसी एक का या एक से अधिक चक्रो का खराब होना होता है।*
Astrology or Vastu Solutions easy in (astha Jyotish)
Vastu Guru-Mkpoddar. Wp.9333112719.
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MKwithVastu.
1*(मूलाधार चक्र)
चक्रो में सबसे पहले मूलाधार चक्र का आता है मूलाधार चक्र के खराब होने से मुख्यता प्रोस्टेट,गठिया,वेरिकोज वेन,कूल्हे की समस्या,घुटनों में समस्या,खाना अच्छा न लगना,लूज मोशन या कब्ज की समस्या,बवासीर आदि है।
2* दूसरा चक्र है (सेक्रल चक्र)
सक्रेल चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती है। हर्निया,आतों की दिक्कत,महिलाओं में मासिक धर्म,खून की कमी,नपुंसकता,गुर्दे की समस्या,मूत्र संबंधि रोग आदि।
3* तीसरा चक्र है (मणिपुर चक्र)
मणिपुर चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती है। लीवर सिरोसिस,फैटी लीवर,शुगर,किडनी संबंधित समस्या,पाचन संबंधी समस्या,पेट में गैस,अल्सर आदि।
4* चौथा चक्र है (हार्ट चक्र)
हार्ट चक्र के खराब होने से ह्रदय की बीमारी,बी पी हाई या लौ होना,लंग्स में दिक्कत,स्तन कैंसर,छाती में दर्द, रक्षाप्रणाली में विकार आदि।
5* पांचवा चक्र है (थ्रोट चक्र)
थ्रोट चक्र के खराब होने से मुख्यतः निम्न बीमारी होती है।
थ्योरोइड,जुकाम,बुखार,मुँह,जबड़ा,जिव्हा,कंधा और गर्दन,हार्मोन राजोवृति आदि।
6* छटा चक्र है (थर्ड ऑय)
चक्र थर्ड ऑय चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती हैं।
आँख,कान,नाक हार्मोन्स की प्रोब्लम,सिर दर्द,अनिंद्रा, आधे सिर में दर्द आदि।
7* सातवाँ चक्र है (क्राउन चक्र)
क्राउन चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती है। मानसिक रोग,नाडी रोग,मिर्गी,अधरंग,लकवा,सिर दर्द, हाथ पैरों का सुन्न होना।
अधीक जानकारी के लिये संपर्क करें wp 9333112719 ।
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रे जीवन में किसी भी बीमारी का कारण हमारे सातो चक्रों
में से किसी एक का या एक से अधिक चक्रो का खराब होना होता है।*
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1*(मूलाधार चक्र)
चक्रो में सबसे पहले मूलाधार चक्र का आता है मूलाधार चक्र के खराब होने से मुख्यता प्रोस्टेट,गठिया,वेरिकोज वेन,कूल्हे की समस्या,घुटनों में समस्या,खाना अच्छा न लगना,लूज मोशन या कब्ज की समस्या,बवासीर आदि है।
2* दूसरा चक्र है (सेक्रल चक्र)
सक्रेल चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती है। हर्निया,आतों की दिक्कत,महिलाओं में मासिक धर्म,खून की कमी,नपुंसकता,गुर्दे की समस्या,मूत्र संबंधि रोग आदि।
3* तीसरा चक्र है (मणिपुर चक्र)
मणिपुर चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती है। लीवर सिरोसिस,फैटी लीवर,शुगर,किडनी संबंधित समस्या,पाचन संबंधी समस्या,पेट में गैस,अल्सर आदि।
4* चौथा चक्र है (हार्ट चक्र)
हार्ट चक्र के खराब होने से ह्रदय की बीमारी,बी पी हाई या लौ होना,लंग्स में दिक्कत,स्तन कैंसर,छाती में दर्द, रक्षाप्रणाली में विकार आदि।
5* पांचवा चक्र है (थ्रोट चक्र)
थ्रोट चक्र के खराब होने से मुख्यतः निम्न बीमारी होती है।
थ्योरोइड,जुकाम,बुखार,मुँह,जबड़ा,जिव्हा,कंधा और गर्दन,हार्मोन राजोवृति आदि।
6* छटा चक्र है (थर्ड ऑय)
चक्र थर्ड ऑय चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती हैं।
आँख,कान,नाक हार्मोन्स की प्रोब्लम,सिर दर्द,अनिंद्रा, आधे सिर में दर्द आदि।
7* सातवाँ चक्र है (क्राउन चक्र)
क्राउन चक्र के खराब होने से निम्न बीमारी होती है। मानसिक रोग,नाडी रोग,मिर्गी,अधरंग,लकवा,सिर दर्द, हाथ पैरों का सुन्न होना।
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Friday, 20 December 2019
LOSU GRID VASTU NUMEROLOGY
LO SHU GRID NUMERLOGY
लोशु ग्रिड एस्ट्रोलॉजी
लोशु ग्रिड की उत्पत्ति चीन में हुई, लोशु ग्रिड के माध्यम से कुंडली देखकर जीवन में आ रही समस्याओं का पता लगाया जा सकता हैं एवं समस्याओं का निवारण किया जा सकता हैं
यह बहुत प्राचीन पद्धति है
लोशु ग्रिड में 1 से लेकर 9 तक अंको का एक वर्ग होता हैं तीन vertical (ऊपर से नीचे ) ,तथा तीन horizontal (वाए से दाए ) बाक्स होते हैं प्रत्येक बाक्स में एक नम्बर होता हैं जो उसी बाक्स का नम्बर होता हैं यह नम्बर बदलती नही है
बाक्स के नम्बर को कभी तरफ से जोडे तो योग 15 आता है प्रत्येक नम्बर किसी न किसी ग्रह का होता हैं इन नम्बर का प्रयोग कुंडली देखने के लिए किया जाता ।
नम्बर- 1
ग्रह-सूर्य
गुण – केरियर
नम्बर- 2
ग्रह- चन्द्रमा
गुण – विवाह एवं मधुर संबंध
नम्बर- 3
ग्रह- गुरू
गुण – परिवार एवं स्वास्थ्य
नम्बर- 4
ग्रह- राहु
गुण – सम्पत्ति
नम्बर- 5
ग्रह- बुध
गुण – ऊर्जा
नम्बर- 6
ग्रह-शुक्र
गुण – सहायक मित्र
नम्बर- 7
ग्रह-केतु
गुण – बच्चे
नम्बर- 8
ग्रह-शनि
गुण – ज्ञान
नम्बर- 9
ग्रह- मंगल
गुण – प्रसिद्धि
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लोशु ग्रिड एस्ट्रोलॉजी
लोशु ग्रिड की उत्पत्ति चीन में हुई, लोशु ग्रिड के माध्यम से कुंडली देखकर जीवन में आ रही समस्याओं का पता लगाया जा सकता हैं एवं समस्याओं का निवारण किया जा सकता हैं
यह बहुत प्राचीन पद्धति है
लोशु ग्रिड में 1 से लेकर 9 तक अंको का एक वर्ग होता हैं तीन vertical (ऊपर से नीचे ) ,तथा तीन horizontal (वाए से दाए ) बाक्स होते हैं प्रत्येक बाक्स में एक नम्बर होता हैं जो उसी बाक्स का नम्बर होता हैं यह नम्बर बदलती नही है
बाक्स के नम्बर को कभी तरफ से जोडे तो योग 15 आता है प्रत्येक नम्बर किसी न किसी ग्रह का होता हैं इन नम्बर का प्रयोग कुंडली देखने के लिए किया जाता ।
नम्बर- 1
ग्रह-सूर्य
गुण – केरियर
नम्बर- 2
ग्रह- चन्द्रमा
गुण – विवाह एवं मधुर संबंध
नम्बर- 3
ग्रह- गुरू
गुण – परिवार एवं स्वास्थ्य
नम्बर- 4
ग्रह- राहु
गुण – सम्पत्ति
नम्बर- 5
ग्रह- बुध
गुण – ऊर्जा
नम्बर- 6
ग्रह-शुक्र
गुण – सहायक मित्र
नम्बर- 7
ग्रह-केतु
गुण – बच्चे
नम्बर- 8
ग्रह-शनि
गुण – ज्ञान
नम्बर- 9
ग्रह- मंगल
गुण – प्रसिद्धि
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